एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सालों बाद दीक्षांत में इतनी ‘भव्यता’ दिख रही है, ऐसे ‘आलीशान’ कार्यक्रम कराने के लिए कभी कुलपति एमडी तिवारी चर्चाओं में रहते थे। बीस साल बाद उनकी यादें फिर इस दीक्षांत पर ताजा हो गईं। मौजूदा कुलपति भी उसी अंदाज में इस बार दीक्षांत करा रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की बदहाली न पहले कोई देखता था और न ही अब। हालात यह हैं कि करोड़ों दीक्षांत पर तो खर्च होंगे पर बीस साल पहले बनें भवनों की मरम्मत तक कराने के लिए विवि के पास पैसा नहीं है। माना जा रहा है कि एक दिन के इस आयोजन के लिए करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे। विश्वविद्यालय के इतिहास में यह सबसे महंगा दीक्षांत समारोह होगा। सिर्फ टेंट पर ही करीब 25 से 30 लाख खर्च होने अनुमान है और यह टेंट भी लखनऊ से मंगाया गया है।
पूर्व कुलपति डॉ. एमडी तिवारी ने अपने कार्यकाल में स्टेडियम में दीक्षांत कराने की परंपरा शुरू की थी। एक बार राज्यपाल मोती लाल बोरा को आना था, लेकिन बारिश होने के कारण दीक्षांत में खलल पड़ गई, जिसके बाद कई करोड़ की लागत से मल्टीपरपज हाल तैयार कराया गया। प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी के कार्यकाल में भी एक बार दीक्षांत मैदान में टेंट लगाकर हुआ था। विश्वविद्यालय के सूत्रों की माने तो उसके बाद सभी दीक्षांत सामान्य ही हुई। मल्टीपरज हाल बदहाल हो गया, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं कराई गई उसकी मरम्मत के बजाए हर साल दस लाख का टेंट लगाकर इस बदहाल भवन में ही दीक्षांत कराया जाता रहा। इस बार भी मरम्मत की जगह लाखों रुपये टेंट पर खर्च करना विवि प्रशासन ने ज्यादा मुनासिब समझा। भवनों की रंगाई पुताई, नई सड़क व अन्य कार्यों को मिलाकर करीब ढाई तीन करोड़ खर्च होने का अनुमान विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े अफसरों को है।
दीक्षांत के हर साल का बजट 30 लाख
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का बजट वैसे तो तीस लाख तक रहता है। हर साल औसतन बीस लाख रुपये खर्च होते हैं। इसमें भी आठ से दस लाख रुपये मल्टीपरपज हाल में टेंट में खर्च होते थे। इस बार कुल खर्च का ग्राफ कई गुना बढ़ गया। हालांकि विवि प्रशासन का कहना है कि दीक्षांत के बजट से दीक्षांत कराया जा रहा है और मेंटेनेंस के बजट से बाकी कार्य किए गए।
ये बदहाली कब होगी दूर
विवि में यह हैं बदहाल
-मल्टीपरपज हाल कई साल से जर्जर हालत में है, इसकी मरम्मत तक नहीं कराई जा सकी।
-केंद्रीय प्रयोगशाला का सिर्फ भवन ही बना खड़ा, यहां एक भी उपकरण नहीं लग सका जबकि राज्यपाल ने दीक्षांत पर ही इसका उद्घाटन किया था।
-केंद्रीय कंप्यूटर सेंटर में यूपीएस तक नहीं, छात्र यहां प्रोजेक्ट वर्क तक नहीं कर पाते। आठ साल से कंप्यूटर सेंटर का यही हाल है।
- कर्मचारियों के क्वार्टर के हाल खराब, सड़क और शौचालयों की मरम्मत तक नहीं हो सकी।
-बजट के चलते अभी तक सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लग पाए जबकि कई बार घटनाएं हो चुकी हैं।
-बजट के अभाव में ही माइक्रोबायोलॉजी विषय नहीं शुरू हो सका।
-कई भवनों में दीमक लगी चुकी है, लेकिन उनको कोई उपयोग नहीं हो सका, जबकि करोड़ो की लागत से यह बनें थे जिनकी मेंटेनेंस नहीं की गई।
दीक्षांत समारोह के लिए
-करीब 70 लाख की लागत से सड़क बनी।
- करीब 30 लाख टेंट पर खर्च होंगे।
-करीब दस से बारह लाख खाने पीने पर खर्च होंगे।
-रंगाई पुताई, नए बोर्ड, गर्ल्स हास्टल की रंगाई, गेस्ट हाउस की रंगाई, गेट प्रशासनिक भवन को मिलाकर करीब साठ लाख से ज्यादा खर्च हुए।
-अन्य खर्चे भी करीब आठ से दस लाख के माने जा रहे हैं।
वर्जन
दीक्षांत के लिए टेंट और अन्य खर्चे दीक्षांत के बजट से ही हो रहे हैं। सड़क, रंगाई-पुताई व अन्य कार्य बिल्डिंग मेंटेनेंस के बजट से कर रहे हैं। सब मिलाकर खर्चा तो दो करोड़ से ऊपर बैठेगा।
-सुरेश उपाध्याय, वित्त अधिकारी