माधोटांडा। जंगल से दूर आबादी क्षेत्र में घूम रहे बाघ की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। बुधवार रात चहलकदमी कर रहा बाघ लौकाई फार्म के समीप दलविंदर सिंह के फार्म हाउस की सीमा में घुस गया। रोशनी के चलते नजर पड़ते ही मौजूद परिजन में हड़कंप मच गया। हालांकि शोरशराबा करने पर बाघ मौके से चला गया। रात में ही सामाजिक वानिकी के रेंजर टीम के साथ मौके पर पहुंचे और निगरानी शुरू की। बृहस्पतिवार को देवीपुर गांव की सीमा में नहर पुल के किनारे बाघ के पैरों के निशान ट्रेस किए गए। टीम लगातार निगरानी में जुटी है।
टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर आबादी क्षेत्र में बाघों के घूमने का सिलसिला लगातार जारी है। अमरिया के बाद माधोटांडा क्षेत्र बाघों की शरण स्थली बनता जा रहा है। एक माह पहले से बाघों की अलग अलग क्षेत्रों में मौजूदगी देखी जा रही है। इधर, कलीनगर के निकट हरदोई ब्रांच नहर की पटरियों के आसपास पांच दिन तक डेरा जमाने वाले बाघ की सक्रियता जारी है। पांच किमी दूरी तय कर खन्नौत नदी के क्षेत्र में पहुंचा बाघ फिर पुराने रास्ते पर लौट आया। बुधवार रात करीब नौ बजे बाघ ककरौआ गांव की सीमा से निकलकर लौकाई फार्म के निकट दलविंदर सिंह के फार्म हाउस की सीमा में घुस गया। रोशनी होने के चलते परिजन की बाघ पर नजर पड़ी तो हड़कंप मच गया। शोर शराबा और आग जलाने पर बाघ वहां से हटकर आगे की ओर निकल गया। सूचना मिलते ही सामाजिक वानिकी रेंजर अयूब हसन टीम के साथ मौके पर पहुंचे और निगरानी शुरू कर दी। बृहस्पतिवार को बाघ के ककरौआ से लेकर देवीपुर गांव की सीमा पर खारजा नहर क्षेत्र में पैरों के ताजा निशान मिले। रेंजर अयूब हसन ने बताया टीम लगातार निगरानी कर रही है। क्षेत्रीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।