2020 में सात ग्रामीणों की गई जान
विशेषज्ञों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया था कि बाघों का स्वभाव इंसानों के प्रति मित्रवत होने लगा है। इसके साथ ही बाघों के हमले रोकने के लिए विभाग ठोस कदम उठाना ही भूल गया। इसका खामियाजा वर्ष 2020 में आमजन को उठाना पड़ा। 2020 में सात ग्रामीणों की बाघ के हमलों में मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 2021 में बाघ ने दियोरिया रेंज के जंगल में बाइक सवार को दो युवकों का शिकार कर दहशत फैला दी।
इसके बाद विभाग के साथ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूटीआई की टीम गांव-गांव लोगों को जागरूक करने लगी। इससे लोग तो जागरूक हुए, लेकिन बाघों का आक्रामक रुख नहीं बदल सका। आबादी के क्षेत्र में घूम रहे बाघों के मामले में सिर्फ निगरानी पर अमल किया गया।
नतीजतन, रविवार को न्यूरिया के गांव टंडोला विजेसी निवासी गोकुल मलिक को बाघ ने शिकार कर लिया। ग्रामीणों का कहना है कि पीटीआर के अधिकारियों के पास महज एक ही जवाब रहता है निगरानी की जाएगी। उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं, जिससे बाघ जंगल से बाहर नहीं आ सकें या ग्रामीणों को बाघ के हमलों से बचाया जा सके।