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UP: यूपीएससी में फेल हुई तो बनी फर्जी आईएएस, बेरोजगारों को ठगा; बरेली में दो बहनों समेत तीन गिरफ्तार

Tue, 28 Apr 2026 06:50 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में फर्जी आईएएस बनकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ठगने के आरोप में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो सगी बहनें हैं और एक ममेरी बहन है। पुलिस ने आरोपियों से नकदी, दस्तावेज और एक लग्जरी कार बरामद की है। 
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आरोपी महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में खुद को आईएएस अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ठगने के आरोप में दो सगी बहनों समेत तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। इन पर फर्जी नियुक्ति पत्र देकर सरकारी नौकरी का झांसा देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों से नकदी, दस्तावेज और लक्जरी कार भी बरामद की है। एएसपी पंकज श्रीवास्तव ने मंगलवार को बारादरी थाने में पूरे मामले का खुलासा किया। 

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एएसपी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि बारादरी क्षेत्र में रहने वाली शिखा पाठक ने प्रीति लॉयल से संपर्क बढ़ाया। उसने अपनी बहन डॉ. विप्रा शर्मा को गजरौला में तैनात अपर जिलाधिकारी वित्त बताया। दोनों बहनों ने सचिवालय में ऊंची पहुंच का दावा किया। उन्होंने पीड़ितों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। 

प्रीति लॉयल ने अपने परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद को भी इस सेटिंग के बारे में बताया। सरकारी नौकरी के लालच में इन सभी ने कई किस्तों में लाखों रुपये आरोपियों को दिए। पुलिस के अनुसार, ठगी में दीक्षा पाठक का नाम भी सामने आया है। यह शिखा की ममेरी बहन है। दोनों बहनों ने खुद को प्रभावशाली अधिकारी दिखाते हुए कथित तौर पर शासन स्तर के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए। 

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यूपीएससी की परीक्षा दे चुकी है विप्रा 
एएसपी के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ में पता लगा है कि डॉ. विप्रा शर्मा ने 2012 से 2020 तक यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। कई बार परीक्षा दी, लेकिन वह फेल होती रही। नाकाम होने पर वह फर्जी आईएएस बन बैठी और बहन के साथ मिलकर बेरोजगार लोगों से ठगी करने लगी। 

फर्जी नियुक्ति पत्र और ठगी का खुलासा
आरोपियों ने कंप्यूटर परिचालक समेत विभिन्न पदों पर नियुक्ति का दावा किया। जब चारों युवक लखनऊ के विभूति खंड में जॉइनिंग के लिए पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि ऐसी कोई भर्ती नहीं निकली थी। पीड़ितों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है जिसमें परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हैं। बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह के मुताबिक, चार पीड़ितों ने करीब साढ़े 11 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है।
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ये हुई बरामदगी
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से कूटरचित दस्तावेज, 10 चेकबुक, चार मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 4.50 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा एक लक्जरी कार भी जब्त की गई है। साथ ही विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 55 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यह संगठित ठगी का मामला है और जांच में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।

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