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Bareilly News: घायलों की जान का जोखिम कम कर सकता है तीन सौ बेड अस्पताल

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बरेली। मानव संसाधन की कमी से जूझ रहे तीन सौ बेड अस्पताल में करोड़ों के अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरण धूल फांक रहे हैं। ओपीडी भी अब रैबीज क्लीनिक तक सिमटकर रह गई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर ट्रॉमा सेंटर के तौर पर इसका संचालन किया जा सकता है। इससे घायलों को रेफर नहीं करना पड़ेगा। उनकी जान का जोखिम कम होगा। शहरवासियों सहित जनप्रतिनिधि भी इसके लिए लगातार मांग उठा रहे हैं।
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पूर्व सीएमओ डॉ. सुधीर गर्ग के मुताबिक तीन सौ बेड अस्पताल के संचालन के लिए चार सौ स्टाफ चाहिए। जबकि, ट्रॉमा सेंटर संचालन के लिए एक चौथाई स्टाफ और विशेषज्ञ की ही जरूरत होगी। इससे अस्पताल में धूल फांक रहे वेंटिलेटर समेत एचएफएनसी आदि महंगे उपकरणों का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा। जिला अस्पताल के पुराने परिसर में प्रस्तावित ट्रॉमा विंग सघन बाजार के बीच है। एंबुलेंस की आवाजाही में वक्त लगता है। तीन सौ बेड अस्पताल शहर के बाहरी हिस्से में होने से मरीज जल्दी पहुंच सकेंगे और उनका बेहतर तरीके से इलाज भी हो सकेगा।
दुर्घटनाएं ज्यादातर हाईवे पर होती हैं। तीन सौ बेड अस्पताल पीलीभीत बाइपास और शाहजहांपुर रोड दो हाईवे का डायवर्जन प्वॉइंट है। डबल लेन रोड होने से वाहनों की आवाजाही भी आसान है। अस्पताल के एक ओर ट्रामा सेंटर और दूसरी ओर ओपीडी का संचालन आसानी से किया जा सकता है।
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तीन सौ बेड अस्पताल में सीटी स्कैन यूनिट भी संचालित है। करीब 60 फीसदी दुर्घटनाग्रस्त मरीजों की सीटी स्कैन जांच करानी पड़ती है। इसके लिए मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी से तीन सौ बेड अस्पताल लाया जाता है। तीन सौ बेड अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनने से इस भागदौड़ से निजात मिलेगी।

जिला अस्पताल में मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की वजह आईसीयू और सीसीयू का न होना है। तीन सौ बेड अस्पताल में 33 वेंटिलेटरयुक्त आईसीयू, 13 एचएफएनसी, एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट, जेनरेटर, फायर फाइटिंग सिस्टम, किड्स वार्ड, पीकू वार्ड, डिलीवरी ओटी समेत बच्चों के लिए वॉर्मर, वेंटिलेटर आदि सुविधाएं हैं। सभी तीन सौ बेड पर ऑक्सीजन की आपूर्ति की भी व्यवस्था है।
चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज के तौर पर तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन करने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन चाहिए। जब तक इसकी उपलब्धता न हो, तब तक इसे ट्रॉमा सेंटर के तौर पर संचालित किया जाए। - राजेश गुप्ता, उद्यमी
करोड़ों का भवन और महंगे उपकरण जर्जर हो रहे हैं। जिला अस्पताल की सड़क अतिक्रमण से संकरी हो गई है। कई बार एंबुलेंस फंस जाती है। घायलों के बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर बनाने पर शासन विचार करे। - सुदेश अग्रवाल, व्यापारी
तीन सौ बेड अस्पताल का बीते दिनों जायजा लिया था। सभी सुविधाएं होने के बावजूद संचालन न होना शासन की मंशा पर प्रश्न चिह्न है। ट्रॉमा सेंटर बनाकर भी घायलों की जान का संकट कम कर सकते हैं। - मयंक शुक्ला ''''मोंटी'''', प्रदेश प्रवक्ता सपा
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