सीडीओ के निर्देश पर हुई जांच में पता चला है कि मजनूपुर ग्राम पंचायत में अच्छन खां के नाम से वर्ष 2019 में ही अलग-अलग तिथियों में तीन मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुए थे। इनमें पहला 27 मार्च को जारी हुआ, इसमें मृत्यु 18 मार्च को दिखाई गई। दूसरा मृत्यु प्रमाणपत्र 15 मार्च को जारी हुआ और मृत्यु 10 मार्च को दिखाई गई है। तीसरा प्रमाणपत्र 30 मार्च को जारी हुआ। इसमें उनकी मृत्यु 25 मार्च को दिखाई गई है।
एडीओ पंचायत मनीष अग्रवाल ने जांच में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2019 में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट के माध्यम से बनाने की व्यवस्था थी। अच्छन खां के बनाए गए तीनों मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफलाइन बने हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि तीनों प्रमाणपत्र फर्जी हैं। इस मामले में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी शिप्रा सिंह से भी पूछताछ हुई है, उन्होंने स्पष्ट कह दिया है कि अच्छन खां नाम का कोई भी मृत्यु प्रमाण पत्र उन्होंने ऑफलाइन भी नहीं जारी किया है।
मजनूपुर ग्राम पंचायत के प्रधान शकील का कहना है कि अच्छन खां नाम से कोई भी व्यक्ति उनके गांव में नहीं है। ऐसे में साफ है कि महिला कल्याण विभाग की विधवा पेंशन योजना में बड़े स्तर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपात्रों को पेंशन दी जा रही है।