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तीन दिन बाद सुपरवाइजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज

Tue, 09 Feb 2016 01:33 AM IST
बरेली
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शनिवार की रात को बरेली कॉलेज के प्राचार्य के आवास में 35 वर्षीय गनमैन सोमप्रकाश की हत्या के मामले में बारादरी पुलिस ने तीन दिन बाद एसपी देहात यमुना प्रसाद के डपटने पर कार्रवाई की। मृतक के भाई सरजीत सिंह की तहरीर पर पुलिस ने शिव सिक्योरिटी कंपनी के सुपरवाइजर और उसके साथियों पर हत्या करने के शक में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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थाना दातागंज के गाजीपुर गांव के सरजीत सिंह के भाई ने एसपी देहात को बताया कि छह फरवरी की रात को गोली लगने से मौत हो गई थी। उनका शव बरेली कॉलेज के प्राचार्य के आवास में पड़ा मिला था। पास में टूटी हुई बंदूक मिली थी। बंदूक से चला हुआ कारतूस उसमें फंसा था। पुलिस और फील्ड यूनिट की टीम उसी दिन से सोमप्रकाश की मौत को आत्महत्या बता रही है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने मुकदमा लिखना भी जरूरी नहीं समझा। बहानेबाजी यह थी कि कोई मुकदमा लिखाने ही नहीं आ रहा है। जबकि घटना के अगले ही दिन सुबह से सरजीत सिंह सिक्योरिटी कंपनी के सुपरवाइजर बबलू उर्फ राजीव कुमार पर रंजिशन अपने भाई सोमप्रकाश की हत्या करने के आरोप लगा रहा है। इसके पीछे उसका तर्क यह है कि सोमप्रकाश और सुपरवाइजर रामगंगा बैराज पर एक साथ नौकरी करते थे। सोमप्रकाश ने सुपरवाइजर को सरिया और तेल चोरी करते हुए पकड़ लिया था। इसके बाद से ही बबलू उसके भाई से रंजिश रखने लगा था। कई बार उसने सोमप्रकाश को जान से मारने की धमकी भी दी थी। शिकायत पर हटाए जाने के बाद से सुपरवाइजर और अधिक  रंजिश रखने लगा था। सुपरवाइजर सिक्योरिटी कंपनी के मालिक का रिश्तेदार है। इसलिए पुलिस भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

वादी ने ही शुरू की तफ्तीश
गनमैन की कोई सिफारिश करने वाला नहीं है। शायद यही वजह है कि घटना के बाद से किसी पुलिस वाले ने मौके पर जाकर नहीं देखा है। सोमवार को सोमप्रकाश की हत्या का मुकदमा लिखाने वाले उसके छोटे भाई सरजीत सिंह ने खुद ही तफ्तीश शुरू कर दी। वह अपने गांव के प्रधान और कई लोगों के साथ मौके पर पहुंच गया। दीवार पर खून से सनी उंगली के निशान देखकर उसने पुलिस को फोन करके सवाल भी किया। कहने लगा उसके भाई ने आत्महत्या की है तो दस कदम दूरी पर दीवार पर खून के निशान कहां से आए गए। उसका कहना है कि दीवार की कोर भी उसके भाई की बंदूक की छीनाझपटी से ही टूटी है। इसके अलावा प्राचार्य के आवास के आंगन में पैरों और जूतों के निशान कहां से आए हैं।  
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