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Bareilly: इंस्पेक्टर समेत पुलिस टीम पर फायरिंग के तीन आरोपी दोषमुक्त, कोर्ट ने कहा- साक्ष्यों में विरोधाभास

Tue, 04 Nov 2025 02:00 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में पुलिस टीम पर फायरिंग व जानलेवा हमला करने के तीन आरोपियों को कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने पेश किए गए साक्ष्यों में विरोधाभास और बरामदगी को संदिग्ध बताया है।
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जनपद न्यायालय,बरेली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-छह) तबरेज अहमद ने इज्जतनगर के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत पुलिस टीम पर फायरिंग व जानलेवा हमला करने के आरोपी बदायूं के थाना जरीफनगर के गांव रामपुर टप्पा निवासी मुन्नन खां और संभल के थाना धनारी के गांव मढ़ी बिचौला निवासी सदाकत व इब्ने को दोषमुक्त करार दिया है। पेश किए गए साक्ष्यों में विरोधाभास और बरामदगी को संदिग्ध बताया है।

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इज्जतनगर थाने के तत्कालीन प्रभारी एमपी अशोक ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 जनवरी 2023 को वह हमराह एसआई वीर सिंह, कांस्टेबल राकेश कुमार, राजेंद्र के साथ चेकिंग करने निकले थे। जैन ईंट भट्ठे के पास कांस्टेबल राजेश प्रताप सिंह और गंगादीन मिले। पुलिस टीम पैदल गश्त करते हुए बसंत विहार कॉलोनी की ओर जा रही थी। तड़के 4:30 बजे एक लकड़ी की टाल के पास अंधेरे में छिपे बैठे तीन संदिग्ध दिखे। टोकने पर संदिग्धों ने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस टीम ने पीछा कर आरोपी मुन्नन खां, इब्ने और सदाकत को पकड़ लिया। मुन्नन खां, इब्ने के पास से 12 बोर के दो तमंचे और कारतूस मिले।
 
विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने कोर्ट में 11 साक्ष्य तो प्रस्तुत किए, लेकिन कोई स्वतंत्र गवाह पेश करने में नाकाम रहा। पुलिस टीम की थाने से रवानगी संबंधी रोजनामचा और आरोपियों से बरामद सामान भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मुन्नन खां, इब्ने और सदाकत को दोषमुक्त करार दिया है। 

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कोर्ट की टिप्पणी- विवेचक निष्पक्ष नहीं, बरामदगी भी संदिग्ध
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि पेश किए गए मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्यों से आरोपियों से तमंचे व कारतूसों की बरामदगी संदिग्ध प्रतीत होती है। पुलिसकर्मियों के अतिरिक्त इसका कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। अभियुक्तों पर पुलिस टीम पर फायरिंग करने का आरोप है, लेकिन मौके से कोई खोखा नहीं मिला। पुलिस टीम की रवानगी का रोजनामचा दाखिल नहीं किया गया। 

ऐसे में घटनास्थल पर पुलिस टीम की मौजूदगी संदिग्ध प्रतीत होती है। इस प्रकरण में विवेचक को भी निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता। अभियोजन पक्ष तीनों अभियुक्तों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा है। साक्ष्यों में विसंगतियां, विरोधाभास, संदिग्धता और त्रुटियां हैं। अभियुक्तों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।
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