बंदिशों में मनाई जाएगी जन्माष्टमी, लोगों के घरों में कैद होने से फीका हुआ त्योहार
बरेली। कंटेन्मेंट जोन बनाए गए बिहारीपुर का आधे से ज्यादा इलाका आज भी बंदिश में है। आवाजाही रोकने के लिए यहां कई जगह बल्लियां लगी हैं। कुछ जगह पुलिस का पहरा भी है। कोरोना संक्रमण के लगातार कई केस मिलने और मौतें होने से लोग सहमे हुए हैं। इस बार जन्माष्टमी का पर्व भी यहां फीका है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम पहुंची तो प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में ताला पड़ा मिला। बताया गया कि पूजन केवल औपचारिकता को ही होगा। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर करीब सौ साल पहले बनाए गए इस मंदिर के नाम पर ही बस्ती का नाम बिहारीपुर पड़ा था। यहां मिलीं पुजारी की वयोवृद्ध बुआ भी कोरोना को कोसती नजर आईं। अलग-अलग लोगों से बात की तो सभी ने कोरोना की वजह से हो रही दुश्वारियों को अपने तरीके से बयां किया-
खुद ही नहीं निकल रहे बाहर: अभिलाष
बिहारीपुर के बंद हिस्से बजरिया निवासी पेंट व्यवसायी अभिलाष खंडेलवाल ने बताया कि इस बार पुलिस ने खास सख्ती नहीं की है, लेकिन मौतों के लगातार बढ़ रहे आंकड़े से लोग खुद ही सहमे हैं। त्योहार भी घरों में ही मनाएंगे।
कोरोना ने चौपट किया काम: शारदा
दूध विक्रेता शारदा देवी अपने घर के दरवाजे पर बैठी मिलीं। बोलीं- कोरोना ने सभी को घरों में कैद कर दिया है। उनका तो दूध-दही का धंधा भी चौपट कर दिया है। बिना दाम क्या त्योहार और क्या उसका आनंद।
सुबोध बोले- सुनसान हो गया मोहल्ला
वाटर प्लांट के संचालक सुबोध मेहरा ने बताया कि उनके मोहल्ले में सुबह और शाम की रंगत देखते ही बनती थी। अब कोरोना ने ऐसा कहर ढाया है कि समझदार लोग खुद ही नहीं निकल रहे हैं। वे लोग दुआ करते हैं कि जल्दी से बला टले और बस्ती गुलजार हो।
कोरोना न होता तो धूमधाम से मनाते त्योहार
90 साल की पुन्नो देवी शर्मा बांके बिहारी मंदिर के पुजारी के परिवार की बुजुर्ग सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि कर्फ्यू तक में उनके मोहल्ले के लोगों की जिंदादिली कायम रही थी, लेकिन इस बीमारी ने तो सबको अंदर से डरा दिया है। कोरोना को कोसते हुए कहा- बिहारी जी से प्रार्थना है कि जल्दी ये बला खत्म हो जाए।
इस बार मंदिर में नहीं आएगी जनता: मनोज
बांके बिहारी मंदिर के पुजारी मनोज सेवायत ने बताया कि सौ साल से ज्यादा पुराना यह मंदिर वृंदावन के बिहारी जी मंदिर की ही शाखा है। बताया, हर साल जन्माष्टमी पर यहां भव्य कार्यक्रम होता है, लेकिन इस बार नहीं होगा। मंदिर हॉटस्पॉट इलाके में है और वह नहीं चाहते कि किसी भक्त को कोई समस्या हो। वह दो-तीन लोगों के साथ पूजन, आरती की रस्म पूरी करेंगे।
कान्हा चाहते हैं, सब स्वस्थ रहें: मुकेश
इलाके के पार्षद मुकेश मेहरोत्रा ने बताया कि लोग पाबंदियों को खुद ही मानने लगे हैं और घर से कम ही निकलकर पुलिस प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। कान्हा भी तो यही चाहते हैं कि सभी लोग स्वस्थ और प्रसन्न रहें तो हम लोगों को घरों में भजन-पूजन करने में कोई परहेज नहीं होना चाहिए। बीमारी निपट जाएगी तो फिर से मंदिरों और बस्ती की रौनक लौट आएगी।