शिक्षाविदों की अपील- तेज आवाज वाले पटाखों का न करें इस्तेमाल
बरेली। दिवाली दीपों का त्योहार है। लोग आतिशबाजी के धूमधड़ाके के बीच दीयों की रोशनी से पूरे माहौल को जगमग कर दिवाली पर खुशियां मनाते हैं। आतिशबाजी से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर पर्यावरणविद लगातार चिंता जाहिर कर रहे हैं। लोगों को ज्यादा धुएं और तेज आवाज वाले पटाखों का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
अवंतीबाई लोधी राजकीय महाविद्यालय में चित्रकला की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनु महाजन ने कहा कि हर साल दिवाली पर पटाखे, केमिकल युक्त चीजों और प्लास्टिक की वस्तुओं का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। इस दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। लिहाजा पर्यावरण और सेहत का ध्यान रखते हुए ही हमें प्रदूषण मुक्त दिवाली मनानी चाहिए। इसी कॉलेज की खेल एवं शारीरिक शिक्षा की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुभूति कहती हैं कि हमें पर्यावरण के अनुकूल ईको-फ्रेंडली दिवाली मनानी चाहिए। मिट्टी की मूर्तियां पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचातीं हैं, जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां पर्यावरण के लिए ठीक नहीं हैं। कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए हम ईको-फ्रेंडली दिवाली मना सकते हैं और अपनी खुशियों में चार चांद लगा सकते हैं।