बरेली। जिले में बोगस फर्मों का जाल फैला है। छह महीने में इस तरह की दो दर्जन से ज्यादा फर्मों पर केस दर्ज हो चुके हैं। इन घोटाले व फर्जीवाड़े में नामचीन लोग शामिल हैं। अक्सर ऐसे लोगों के नाम जांच के दायरे में उछलते हैं, लेकिन कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच पाती। छोटी मछलियां ही कानून के जाल में फंस पाती हैं।
साइबर थाने के इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय व उनकी टीम ने गाजियाबाद निवासी शातिरों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि अस्तित्वहीन फर्मों के जरिये करोड़ों रुपये का जीएसटी घोटाला कर वह हवाला धंधेबाजों के जरिये रकम का बंदरबांट करते हैं। वर्ष 2017-18 से अनमोल, अंकित और शिशिर बंसल के साथ मिलकर अस्तित्वहीन फर्मों के जरिये धोखाधड़ी कर रहे थे।
गिरोह के सदस्य सुनील, दीपक और साहिल सीधे-सादे लोगों को लालच देकर उनके नाम से फर्जी फर्म खुलवाते थे। इंडियन ट्रेडर्स, राधे ट्रेडर्स, सज्जन ट्रेडर्स और पीसी इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के म्यूल खातों का प्रयोग कर आईटीसी फ्रॉड करते हैं। सीए की मदद से फर्जी ई-वे बिल अपलोड कर आईटीसी क्लेम करते हैं।
बड़े सराफा व्यापारी, फॉरेक्स एक्सचेंज व एयर पे जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर नकदी प्राप्त करते हैं। इसके अलावा, हवाला कारोबारियों के जरिये रुपये का बंदरबांट करते हैं। बरामद दस्तावेजों से पता चला कि एक दर्जन फर्जी फर्मों से 118 करोड़ का फर्जी लेनदेन कर राजस्व की क्षति पहुंचाई गई।