रेलवे को 18 से बीस लाख रुपये हर दिन इनकम देने वाला बरेली जंक्शन भले ही ए वन ग्रेड की श्रेणी में आता हो, लेकिन यहां समस्याओं का भी अंबार है। रेल मंत्री और अधिकारी बड़े वायदे पूरे करना तो छोड़े, सिर्फ यहां छोटी मोटी समस्याएं ही दूर करा दें। इससे इस जंक्शन से हर दिन आने जाने वाले करीब बीस हजार यात्रियों को कुछ सहूलियत मिलेगी। यहां सबसे बड़ी समस्या टिकट पाने की होती है, जंक्शन पर लगी आटोमेटिक टिक मशीनें चलती ही नहीं और विंडो पर लंबी लाइनें लगी रहती हैं। इसके अलावा रिजर्वेशन आफिस के सामने निर्माण चलने से कबाड़ फैला हुआ है। वहीं जंक्शन पर सीटें कम होने से यात्री फर्श और पार्सल घर के सामने पडे़ बंडलों पर बैठने को मजबूर होते हैं।
कोच गाइड सिस्टम अर्से से खराब
जंक्शन के प्लेटफार्म पर आने वाली ट्रेन का कौन सा कोच कहां आएगा, इसकी लोकेशन बताने को कोच गाइड सिस्टम लगा हुआ है, लेकिन यह अर्से से खराब है। प्लेटफार्म नंबर एक पर तो कभी कभार कोच की लोकेशन मिल जाती है, लेकिन दो और तीन व चार पर तो कोच गाइड सिस्टम चलता ही नहीं। जिससे कोच की लोकेशन ही नहीं मिल पाती है और यात्री भटकते रहते हैं।
डिस्प्ले बोर्ड भी ठप पड़ा
पूछताछ केंद्र में बिजली के बोर्ड में खराबी आ जाने से जंक्शन के गेट पर अंदर की तरफ लगा ट्रेनों की लोकेशन बताने वाला डिस्प्ले बोर्ड (प्लाजमा टीवी) खराब पड़ा है। जिससे यात्रियों को ट्रेनों की लोकेशन ही नहीं मिल पा रही है। पूछताछ केेंद्र पर मौजूद कर्मी ने बताया कि बोर्ड ठीक कराने को इलेक्ट्रिक विभाग को सूचित कर दिया गया है, जब वह ठीक कर देगा तो बोर्ड चलने लगेगा।
मेटल डिटेक्टर भी है खराब
जंक्शन के एंट्री गेट पर लगा मेटल डिटेक्टर भी काम नहीं कर रहा है। ऐसे में जंक्शन की सुरक्षा को खतरा सता रहता है। क्योंकि कोई भी आपत्तिजनक वस्तु लेकर प्लेटफार्म पर आसानी से पहुंच सकता है और अप्रिय घटना हो सकती है। मेटल डिटेक्टर यहां अरसे से खराब है। जब एलर्ट किया जाता है तो दुरुस्त कर लगा दिया जाता है।
आटोमेटिक टिकट मशीनें बनी शो फीस
जंक्शन पर टिकट काउंटर के बगल में लगी आटोमेटिक मशीनें खराब होने से शो पीस बनी हुई हैं। अधिकतर यात्रियों को इनसे टिकट लेने का तरीका ही पता नहीं होता, जिन्हें पता भी है तो खराब होने के कारण टिकट मिलता भी नहीं। आगरा के विष्णु ने बताया कि उसने 40 रुपये मशीन में डाले, लेकिन टिकट की बजाए पैसे ही वापस आ गए। मशीन से टिकट न मिलने पर यात्री टिकट काउंटर पर लाइन लगाते दिखते हैं। मशीनों से टिकट लेने की व्यवस्था प्रचार प्रसार के अभाव में भी फेल हो रही है।
प्लेटफार्म पर दौड़ते हैं सामान से लदे रिक्शे
ट्रेनों से बाहर से आने वाले सामान को पार्सल घर तक लाने को ठेली की बजाए तीन पहिया रिक्शों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई नग रिक्शों पर रखकर प्लेटफार्म पर दौड़ाया जाता है। ऐसे में यात्रियों के साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है।
ऑटो वाले जंक्शन के बाहर सबसे बड़ी दिक्कत
बिजनौर के रेल यात्री सुमित ने बताया कि जंक्शन के बाहर सर्कुलेटिंग एरिया में खड़े होने वाले ऑटो वाले सबसे बड़ी दिक्कत हैं। गाड़ी के समय में यह लोग आड़े तिरछे ऑटो लगा लेते हैं, जिससे प्लेटफार्म तक पहुंचना मुश्किल होता है।
यह हैं बड़ी सुविधाओं के वादे
फुट ओवरब्रिज पर मुरादाबाद की तरफ स्वत: संचालित सीढ़ियां लगनी हैं। इनका सामान आ गया, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है
फुट ओवरब्रिज पर शाहजहांपुर की तरफ लिफ्ट लगनी है, लेकिन अभी काम शुरू नहीं हो पाया है।
वाईफाई की सुविधा भी अपनी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है
गंदगी दूर करने को लाइन नंबर पांच पर वाशेबल एप्रन बन रहा है
बरेली से मुरादाबाद तक फोरलेन ट्रैक का निर्माण होना है
जंक्शन पर जो भी समस्या नजर आती है, उसे दूर करने की कोशिश की जा रही है। डिस्प्ले बोर्ड, कोच गाइड सिस्टम को ठीक कराने के लिए विभागीय अधिकारी से कहा गया है। बाहर खड़े होने वाले ऑटो के बारे में कई बार आरपीएफ और जीआरपी अधिकारियों से बात की जा चुकी है। अन्य समस्याओं के समाधान के बारे में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक