फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये विकास है या ऊपरी कमाई के तरीके 

Mon, 20 Feb 2017 12:59 AM IST
बरेली।
विज्ञापन
ये विकास है या ऊपरी कमाई के तरीके  - फोटो : These methods of development or upper earnings
विज्ञापन
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सड़क के किनारे साइकिल ट्रैक बनाने की योजना को बीडीए ने पलीता लगा दिया। ढाई करोड़ के साइकिल ट्रैक ने चार करोड़ की लागत से बनी फोरलेन सड़क की सूरत बिगाड़ दी। सीएम की प्राथमिकता की आड़ में बीडीए ने सड़क को चौड़ा करने के बजाय ऊपरी कमाई का तरीका निकालकर खानापूरी कर दी। अब दुकानदार, मोटर मैकेनिक, रेता बजरी और टेंपो रिक्शों वालों को साइकिल ट्रैक पर अतिक्रमण करने का खुला लाइसेंस मिल गया है। दो साल पहले बने साइकिल ट्रैक के पत्थर भी उखड़ने लगे हैं। दो साल पहले बरेली विकास प्राधिकरण ने सेटेलाइट से शहामतगंज तक 18 सौ मीटर सड़क चौड़ी करने के लिए साढ़े छह करोड़ का एस्टीमेट बनाया।  रास्ते से न बिना पेड़ काटे और बिना अवरोधक हटाए साइकिल ट्रैक बनाने की खानापूरी कर दी गई। ट्रैक की चौड़ाई भी छह से आठ सौ मीटर तक घट गई। ढाई करोड़ के साइकिल ट्रैक ने चार करोड़ की सड़क को चलने लायक नहीं रहने दिया। मौलाना आजाद इंटर कालेज से शहामतगंज तक साइकिल ट्रैक का पता नहीं है। दुकानों के आगे कदम-कदम पर साइकिल ट्रैक में आवागमन के लिए जगह छोड़ दी गई। अब इस ट्रैक के पत्थर उखड़ने लगे हैं। ये साइकिल ट्रैक ठेले, आटो, रिक्शा वालों के अलावा मैकेनिकों के लिए बेहद मुफीद साबित हो रहा है। ये सब इसके अंदर बैठकर अपना कारोबार कर रहे हैं। साइकिल ट्रैक की वजह से सड़क की चौड़ाई कम होने से मालियों की पुलिया और ईसाईयों की पुलिया के अलावा सेटेलाइट के पास रोडवेज बसें निकलने पर प्रतिदिन 24 घंटे में कम से कम 10 बार जाम लगता है। 
विज्ञापन

अतिक्रमण कौन हटाए
बीडीए ने साइकिल ट्रैक के अलावा सड़क से भी अतिक्रमण नहीं हटाया। पहले एक-दो बार अतिक्रमण हटाने की खानापूरी हुई। मगर, अब यहां पहले से ज्यादा अतिक्रमण है। कभी पुलिस न मिलने तो कभी नगर निगम पर अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी डालकर बीडीए अपना पल्ला झाड़ लेता है। साइकिल ट्रैक बनने से 18 सौ मीटर लंबा ये रोड यातायात के नाम पर शहर का सबसे ज्यादा अवरोधक रोड बन गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें