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‘ये मैदान बड़े टूर्नामेंट लायक नहीं’

Thu, 21 Dec 2017 02:18 AM IST
बरेली।
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हाकी मैदान
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भारतीय महिला हॉकी पर बनी शाहरुख खान की फिल्म चक दे इंडिया में पाकिस्तानी टीम के गोल कीपर के तौर पर बहुत छोटी सी भूमिका निभाने वाले शैलेंद्र सिंह भी नॉर्थ जोन हॉकी गर्ल्स टूर्नामेंट की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर नहीं आए। दिल्ली यूनिवर्सिटी की टीम के बतौर कोच बरेली आए हॉकी के नेशनल खिलाड़ी रह चुके शैलेंद्र का कहना है कि जोनल स्तर की प्रतियोगिताएं घास के मैदान पर होनी ही नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि एक मैच के दरम्यान कम से कम चार से छह घंटे का आराम खिलाड़ियों को मिलना चाहिए, जबकि यहां एक ही दिन में दो या तीन मैच कराए जा रहे हैं। उनकी टीम को भी लगातार दो मैच खिला दिए गए और टीम हार गई। नियमानुसार आराम मिला होता तो शायद परिणाम कुछ और होता। उन्होंने इस बाबत दिल्ली हॉकी के सचिव को भी अवगत करा दिया। इसकी शिकायत एआईयू को भी भेजेंगे।
बता दें कि शैलेंद्र सिंह चेक दे इंडिया फिल्म में पाकिस्तानी टीम के गोल की कीपर की भूमिका में थे। फिल्म में शाहरुख खान पेनल्टी शूट आउट में गोल करने से चूक जाते हैं। वह हॉकी लीग खेलने के साथ कई प्रदेश के हॉकी कोच भी रह चुके हैं। वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी के खिलाड़ियों ने हॉस्टल में ठहरने की व्यवस्थाओं पर भी नाराजगी जताई। कहा कि फर्श पर गद्दे बिछाकर रात गुजारनी पड़ी। गर्म पानी भी नहीं मिला। हालांकि, विवि के क्रीड़ा सचिव प्रो. एके जेटली का कहना है कि हर टीम को उनकी यूनिवर्सिटी टीए-डीए देती है। वे पैसा बचा रहे हैं। दो सौ रजाई-गद्दे की व्यवस्था की गई थी। टीम मैनेजर जितने चाहते उतने मिलते।
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पटियाला टीम की कोच बोलीं, मैदान के कारण हारी उनकी टीम
पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला की टीम पिछले साल नॉर्थ जोन में नंबर वन रही थी। इस बार टीम को लखनऊ से हार झेलनी पड़ी। पटियाला टीम की कोच नेशनल स्तर की खिलाड़ी रह चुकीं मीनाक्षी ने हार का जिम्मेदार मैदान को ठहराया। बोलीं, उनकी टीम एस्ट्रोटर्फ पर खेली हुई है। खिलाड़ी घास के मैदान पर उस स्तर का परफॉर्म नहीं कर पाए। हार के बाद उनकी आंखों में आंसू तक आ गए। मीनाक्षी 2007 में भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। वह इटली में आयोजित फोर नेशंस खेल चुकी हैं। उनका कहना है कि वह भी घास के मैदान और एस्ट्रोटर्फ पर खेली हैं, अगर खिलाड़ी लगातार एस्ट्रोटर्फ पर खेलता है तो उसको घास के मैदान पर खेलने में बहुत मुश्किल होती है।
लगातार मैच कराने पर लखनऊ की टीम ने भी जताई आपत्ति
एक ही दिन में कई मैच कराने पर लखनऊ की टीम ने आपत्ति दर्ज कराई। उनकी कोच ने यह मुद्दा उठाया कि उनको एक ही दिन में तीन मैच खिलाए गए। खिलाड़ियों को आराम का वक्त ही नहीं मिला। ऐसे में किसी खिलाड़ी को इंजरी होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। वहीं, यूपी हॉकी टीम के पूर्व कोच फगेंद्र पाल सिंह ने भी टाइमिंग पर आपत्ति जताई। वह विवि के मैदान में थे। उनका कहना था कि एआईयू का नियम भी है कि टीम को मैच के बाद कम से कम चार से घंटे का आराम मिलना चाहिए। घास के मैदान पर हम सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। खिलाड़ी तैयार नहीं कर रहे हैं।
पर्यवेक्षक भेजेंगे एआईयू को रिपोर्ट
एआईयू की तरफ से बतौर पर्यवेक्षक आए हॉकी इंडिया के पूर्व कोच सरदार बलदेव सिंह का कहना है कि हॉकी सुधारने के लिए व्यवस्थाएं सुधारनी बेहद जरूरी हैं। वह इसकी रिपोर्ट एआईयू को भेजेंगे। मुकाबले यहां एस्ट्रोटर्फ पर नहीं बल्कि घास के मैदान पर कराए गए। उनका कहना है कि अब जमाना एस्ट्रोटर्फ का ही है तो हम पुरानी व्यवस्था क्यों ढो रहे हैं। अगर एस्ट्रोटर्फ नहीं है तो एआईयू को मेजबानी देते वक्त यह देखना भी चाहिए। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया जाएगा।
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विवि में भी बनेगा एस्ट्रोटर्फ और सिंथेटिक ट्रैक
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने भी हॉकी को बढ़ावा देने के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान का निर्णय ले लिया है। इसके लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा। शासन से अगर ग्रांट नहीं मिलती है तो खेल के बजट से एस्ट्रोटर्फ बिछाया जाएगा। हालांकि, उससे पहले विवि में सिंथेटिक ट्रैक बनाया जाएगा ताकि एथलेटिक खिलाड़ियों को तैयार किया जा सका। क्रीड़ा सचिव प्रो. एके जेटली ने बताया कि सिंथेटिक ट्रैक और एस्ट्रोटर्फ का प्रस्ताव जल्द रखा जाएगा। सिंथेटिक ट्रैक का कार्य पहले पूरा किया जाएगा।
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