कुंवरपुर तल्लैया के विवाद को लेकर कैंट विधायक राजेश अग्रवाल समय लेकर सोमवार को सुबह एसएसपी आरके भारद्वाज से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे लेकिन वह कार्यालय में मौजूद नहीं थे। लगभग 15 मिनट इंतजार करने के बाद वह लौट गए। गुस्साए कैंट विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एसएसपी की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि एसएसपी ने उनको मिलने का समय दिया था, इसके बावजूद भी न मिलकर उन्होंने एक जनप्रतिनिधि का उपहास उड़ाया है। उन्होंने विधानसभा में इस मामले को अपनी ओर से औचित्य के प्रश्न के रूप में रखने की मांग विधानसभा अध्यक्ष से की है। यह भी कहा है कि विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों के साथ अफसरों के उपेक्षापूर्ण व्यवहार को लेकर वह विधानसभा में धरना भी देंगे।
सोमवार शाम को पत्रकार वार्ता बुलाकर राजेश अग्रवाल ने कहा कि यदि समय देने के बाद भी एसएसपी को किसी आकस्मिक मीटिंग या कार्य से जाना पड़ गया तो उनको फोन पर बताना चाहिए था तो वह नहीं जाते। यह तो उपहास और अपमानित करने जैसा है। बोले- ऐसे अफसरों को सबक सिखाने की भाषा मुझे आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वह विरोधी पक्ष के हैं इसलिए उनके साथ ऐसा व्यवहार जानबूझकर किया गया। उन्होंने रविवार को फोन करके एसएसपी से सोमवार को मिलने का समय लिया था। एसएसपी ने उनको 11 बजे पुलिस दफ्तर में मिलने का समय दे दिया। सोमवार को सुबह निर्धारित समय पर राजेश अग्रवाल पहुंच गए। उनके साथ भाजपा के महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया समेत कई नेता थे। वहां स्टाफ से पूछा तो बताया गया कि साहब नहीं हैं। कब आएंगे? इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद 15-20 मिनट इंतजार करके कैंट विधायक लौट गए। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर पूरी बात से अवगत कराते हुए कहा है कि एसएसपी के व्यवहार से विधान मंडल की गरिमा को ठेस पहुंची है और विधानसभा नियमावली के नियमों के मुताबिक जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकाल का भी उपहास हुआ, यदि ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती तो प्रोटोकाल नियमावली को शिथिल कर दिया जाए।
‘धर्म के आधार पर की कार्रवाई’
बरेली। कैंट विधायक ने कहा कि कुंवरपुर तलैया में पुलिस ने भुक्तभोगी पक्ष की तहरीर आने के बाद दूसरे पक्ष से भी तहरीर लेकर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है। दोनों पक्षों से छह-छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई करके पुलिस ने धार्मिकता को अधार बनाया है। पुलिस की यह कार्रवाई संविधान के खिलाफ है। संविधान में कोई भी कार्रवाई धार्मिक आधार पर नहीं की जा सकती लेकिन अफसर संवैधानिक नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।
-मैंने सोमवार को विधायक जी से मिलने को कहा था। सुबह से ही आला अफसरों की मीटिंग में व्यस्त रहा। पहले डीआईजी साहब और फिर आईजी साहब की मीटिंग चलती रही। लेकिन एसपी देहात और एसपी क्राइम ऑफिस में बैठे थे। उन्हीं को विधायक जी को ज्ञापन दे देना चाहिए था-आरके भारद्वाज, एसएसपी