बाजार में घबराहट का माहौल, जल्द से जल्द स्टॉक निपटाने के लिए जद्दोजहद
बरेली। कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच रात का कर्फ्यू लागू होने से व्यापारियों में फिर घबराहट फैलनी शुरू हो गई है। बाजार लॉकडाउन लगने की आशंका से सहमा दिखाई देने लगा है। इसी वजह से कारोबारियों के बीच अपना स्टॉक निपटाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। थोक में कारोबार करने वाली ज्यादातर फर्मों ने रिटेल कारोबारियों का उधार खाता भी बंद कर दिया है।
फिलहाल जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र में 20 अप्रैल तक ही रात का कर्फ्यू लगाने का एलान किया है लेकिन शुक्रवार को इसका तात्कालिक असर औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों पर साफ तौर पर पड़ता दिखाई दिया। जिस रफ्तार से लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि रात के कर्फ्यू की अवधि आगे और बढ़ेगी। ज्यादातर कारोबारियों का मानना है कि कहने को कर्फ्यू रात को नौ से सुबह छह बजे तक ही रहेगा लेकिन होटल-रेस्टोरेंट जैसे कई कारोबार इतने भर से ही तबाह हो जाएंगे। इसके अलावा रात के कर्फ्यू का असर दिन के कारोबार पर पड़ना भी लाजमी है। कोरोना की दहशत हावी होने के बाद दिन में भी बाजार की रौनक हर हालत में कम हो जाएगी।
कारोबारियों के मुताबिक पिछले साल लॉकडाउन से पहले उन्होंने जो माल उधार में दिया था, उसका पूरा पैसा आज तक नहीं मिल पाया। तमाम छोटे कारोबारी तबाह हो गए लिहाजा उन्हें दिए गए उधार की बमुश्किल आधी-अधूरी वसूली ही हो पाई। अब फिर वही हालात हावी होने लगे हैं। सहालग और त्योहारों के साथ गर्मी के सीजन भी शुरू हो रहा है लेकिन लॉकडाउन की आशंका से उन्हें अपने ही गोदामों में करोड़ों का स्टॉक खटकने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि ये स्टॉक क्लियर न हुआ तो उनकी बड़ी रकम फंस जाएगी। उधार दिया तब भी रकम फंसने का डर है। लिहाजा नकद पर खरीदारी करने पर थोक कारोबारी छूट तक देने को तैयार हैं।
एडवांस दी रकम गंवाकर भी रद्द करा रहे हैं ऑर्डर
शुक्रवार सुबह बाजार खुलने के साथ ऑर्डर रद्द कराने का सिलसिला शुरू हुआ तो यह चर्चा भी शुरू हो गई कि चुनौतीपूर्ण हालात में उधार पर कारोबार जारी रखा जाए या फिर नकद लेनदेन पर ही कारोबार किया जाए। ज्यादातर थोक कारोबारियों ने बड़े ऑर्डर नकद भुगतान पर ही करने का फैसला लिया। हालांकि रिटेल कारोबारियों को लुभाने के लिए छूट के ऑफर देने भी शुरू कर दिए। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक, गारमेंट, होजरी, किराना के थोक कारोबारियों में अपने स्टॉक को क्लियर करने की भी चिंता दिखाई दी।
पिछले साल लॉकडाउन में कारोबार बुरी तरह चौपट हो गया था। पर्यटन, होटल जैसे सेक्टर तो लगभग खत्म ही हो गए। अब फिर वही संकट का दौर लौट रहा है। व्यापारियों में भी दहशत बढ़ रही है। - अनुपम कपूर, अध्यक्ष थोक कपड़ा बाजार एसोसिएशन
नवरात्र और सहालग में फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक बाजार में सबसे ज्यादा कारोबार होता है लेकिन सहालग शुरू होने से पहले ही पाबंदियां लगनी शुरू हो गई हैं। इससे होने वाले नुकसान की कल्पना करना तक मुश्किल है। - हरीश अरोड़ा, अध्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार एसोसिएशन