तीनों टीमें छापे मारने निकलीं, कहीं नहीं मिला मुनाफाखोरी का मामला
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गली नबावान में टीम के पहुंचते ही बंद हो गया दवा बाजार
बरेली। कोरोना के दौर में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और जरूरी चीजों की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी की शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद गठित की गई वाणिज्य कर विभाग के अफसरों की टीमें मुनाफाखोरों पर अब तक कोई ठोस हाथ नहीं डाल पाई हैं। सोमवार को भी टीमों ने मेडिकल स्टोरों पर छापा मारा लेकिन खाली हाथ ही लौट आईं।
दरअसल टीमों के गठन के बाद से ही कारोबारी अलर्ट हो गए हैं। पहले ही दिन जब टीम शास्त्री मार्केट में छापा मारने की तैयारी कर रही थी तो सूचना लीक हो जाने से पूरा मार्केट बंद कर दिया गया था। सोमवार को शहर में कुछ मेडिकल स्टोर और अस्पतालों में जांच की गई। दूसरे नंबर की टीम के वाणिज्य कर अधिकारी भानु प्रताप और कमल कांत बेलवाल गली नवाबान में जांच करने पहुंचे। टीम के आते ही आननफानन अधिकांश दुकानें बंद कर दी गई। खुली दुकानों पर अधिकारियों ने बिल देखे मगर कोई गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई।
एक नंबर की टीम के वाणिज्य कर अधिकारी अनिल कुमार तिवारी और विनोद किशोर ने बदायूं रोड पर अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों की जांच की। मेधांश और दया अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के तीमारदारों से बातचीत की गई। मेडिकल स्टोर पर बिल देखे गए। यहां भी कोई गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई। तीन नंबर टीम के सीटीओ नितिन बाजपेई ने पीलीभीत बाईपास पर जांच की। जनता मेडिकल और बास मेडिकल पर काफी भीड़ थी। दवा खरीद कर जा रहे लोगों को रोककर उनके बिलों का एमआरपी से मिलान कराया। वर्मा केमिस्ट, महागौरी, वीरा आदि पर भी कागज खंगाले। मगर कोई मामला पकड़ में नहीं आया। कोविड की दवाइयों की भी कमी नहीं थी।