केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन योजना के दूसरे चरण में चयनित 36 शहरों की सूची में बरेली फिर टॉप 20 में जगह नहीं बना पाया। इस बार फिर 29 वें नंबर आया। टॉप रैकिंग में झांसी, अलीगढ़ और इलाहाबाद को जगह मिल गई लेकिन बरेली इतना पिछड़ गया कि तीसरे राउंड में भी उसकी भरपाई मुश्किल लग रही है। बरेली के पिछड़ने के पीछे प्रबुद्धजन नगर निगम की खामियों के अलावा केंद्र में ठीक से पैरवी न होना मान रहे हैं। उनका कहना है कि नगर निगम में आय के स्रोत न बढ़ना, कूड़ा प्रबंधन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का ढाई साल से बंद होना, फेरी नीति लागू न होने जैसी खामियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
देश के तेजी से विकसित होने वाले 36 शहरों की सूची में बरेली 29 वें नंबर पर है। योजना के दूसरे चरण में 63 शहरों ने स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजे थे। उनमें 27 के प्रोजेक्ट बेहतर पाए गए और उन शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चुन लिया गया। कंसल्टेंट एजेंसी दराशा एंड कंपनी के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को 100 में से 50 नंबर मिले हैं। गाजियाबाद 26 वें नंबर पर हमसे ऊपर है। केंद्र की सूची में इलाहाबाद सात, अलीगढ़ छह और झांसी नंबर एक पर रहा। गाजियाबाद मात्र .86 नंबर लेकर बरेली से आगे निकल गया। कंसल्टेंट एजेंसी इसके लिए नगर निगम की कम टैक्स वसूली, कूड़ा प्रबंधन और निस्तारण की खामियों को जिम्मेदार मान रही है। एजेंसी के प्लानिंग हेड मुजीबुर्रहमान का का कहना है कि बरेली को पहले अपनी आमदनी के स्रोत बढ़ाने होंगे। प्राइवेट प्रापर्टी और अन्य संसाधन के अलावा कूड़ा प्रबंधन और निस्तारण को ठीक करना होगा। तभी वह स्मार्ट शहरों की सूची में जगह पा सकेगी।
पहले राउंड में 88 वीं रैंक थी
पहले राउंड में नगर निगम ने ग्रीन फील्ड डेवलपमेंट के तहत रामगंगा नगर को स्मार्ट बनाने का प्रोजेक्ट बनाया था। उसमें बरेली को 88 वीं रैंक मिली थी। अबकी बार के प्रोजेक्ट में रेट्रोफिटिंग पर काम किया गया। इसमें बरेली का 29 वां नंबर आया।
क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि और प्रबुद्धजन
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बुंदेलखंड हमसे पिछड़ा है लेकिन झांसी बरेली से आगे निकल गया। हमारे प्रोजेक्ट में कोई कमी नहीं थी। कंसल्टेंट एजेंसी और अफसरों ने भी खूब मेहनत की लेकिन केंद्र में हमारी ठीक ढंग से पैरवी नहीं हो पाई। इस वजह से बरेली पिछड़ गया।
-राजेश अग्रवाल, पार्षद दल नेता सपा
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नगर निगम कंसल्टेंट एजेंसी से स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट ठीक से नहीं बनवा पाया। अगर प्रोजेक्ट ठीक से बनाया जाता। आमदनी के स्रोत बढ़ाने की कोशिश की जाती हो जाता तो दूसरे चरण में बरेली का चयन निश्चित रुप से हो जाता।
-विकास शर्मा, नेता भाजपा पार्षद दल
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स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में मूल कमियों सड़क, बिजली, पानी, सीवर और कूड़ा प्रबंधन और निस्तारण के प्रयास नहीं किए गए। जनता को सुधार के प्रति जागरूक नहीं किया गया। इसीलिए बरेली अन्य शहरों से पिछड़ गया।
- सीता पटेल
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स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट बनाकर भेजना, ये सब ड्रामा है। केंद्र सरकार को जो शहर स्मार्ट सिटी के लिए लेने हैं, वह सब पहले से तय हैं। अन्यथा क्या वजह है कि इस बार तो प्रोजेक्ट में कोई कमी नहीं थी। फिर भी बरेली का सेलेक्शन नहीं हो पाया।
-आलोक तायल पार्षद निर्दलीय
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जब सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद है, कूड़ा प्रबंधन के इंतजाम नहीं हैं। पुरानी सीवर है, आधे से ज्यादा शहर में सीवर नहीं है। ऐसे में हम कैसे स्मार्ट हो सकते हैं। पहले मूलभूत खामियां तो ठीक करें। तब आगे की सोचें।
-अजय सक्सेना, पार्षद भाजपा
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कूड़े का प्रबंधन, निस्तारण न होना, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट न होना, सिटीजन चार्टर से जनसमस्याओं का निस्तारण न होना, बरेली नगर निगम के पिछड़ने की वजह है। आरटीआई की सूचना तक तो समय नहीं देते। ऐसे में अगर बरेली 29 वें नंबर पर है तो आश्चर्य की बात नहीं।
-डॉ. प्रदीप कुमार, सचिव जागर जनकल्याण समिति