160 से अधिक नाटकों में किया अभिनय
जेसी पालीवाल ने अपने जीवन में 160 से अधिक नाटकों में अभिनय कर देशभर में बतौर रंगकर्मी अपनी पहचान बनाई। बतौर कलाकार उन्होंने डॉ. सदन मोहन लाल के निर्देशन में 'कीचड़ के फूल' नाटक में अंतिम बार अभिनय किया था। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 1977
से 1986 तक 216 नाटकों का सफल निर्देशन भी किया।
उनके कुछ चर्चित नाटकों में नई किरण, वक्त की आवाज, चिट्ठी आई है, नया सवेरा, मौत का सौदागर, मेरी आवाज सुनो, हम सब एक हैं, शामिल है। रंगकर्मी के रूप में 23 नवंबर 1956 को उन्होंने अपने नाट्य दल के साथ खन्नू मोहल्ला निवासी सहकर्मी केवी टंडन के घर
में पहले नाटक का रिहर्सल किया था। इसका निर्देशन तत्कालीन कमिश्नर की पत्नी लीलावती डे ने किया था।
समाजसेवा में रहे अग्रणी
जेसी पालीवाल की पहचान शहर में समाजसेवी के रूप में भी रही। 1961 में सिविल डिफेंस की स्थापना हुई और वह इसके सदस्य रहे। उन्हें वर्ष 2006 में आउटस्टैंडिंग रोटेरियन सम्मान दिया गया। अनाथालयों में उनकी टीम सेवा करती थी। कलक्ट्रेट में होने वाले राष्ट्रीय
पर्व पर उन्हें 1956 में संयोजक बनाया गया। महिला पुलिस परामर्श केंद्र में काउंसलर की भूमिका निभाई।
1992 में मिला था कबीर पुरस्कार
13 अगस्त 1994 को तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने उन्हें कबीर पुरस्कार से सम्मानित किया था। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद जब दंगे शुरू हुए तो उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को समझाया था। दंगों को शांत करवाने में भूमिका
निभाई थी।
इससे पहले 27 जुलाई 1989 को खानकाह-ए-वासलिया के सज्जादानशीन रईस मियां कादरी ने उनको कौमी एकता सम्मान से नवाजा था। इसके बाद उन्हें साल दर साल 98 पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें अंतिम बार 20 फरवरी 2020 को इंटरनेशनल
थिएटर फेस्टिवल बेस्ट कल्चरल पर्सन इन एशिया सम्मान बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दिया गया था।