रामगंगा पर प्रस्तावित पुल का निर्माण कार्य समय पर पूरा होने की संभावना कम है। धीमी गति और मनमानी से चल रहे कार्य पर सेतु निगम अफसरों ने तीखी नाराजगी जताई है। इसके साथ अब एमडी ने प्रोजेक्ट जल्द पूरा कराने के लिए यूनिट वन से काम छीनकर दूसरी इकाई को दे दिया है। इससे विभाग में खलबली मची हुई है।
सेतु निगम ने चौबारी स्थित रामगंगा नदी बने पुराने ब्रिज पर बढ़ते बोझ का कम करने को एक समानांतर ब्रिज जून 2016 में बनवाना शुरू किया था, इससे नदी पर फोरलेन यातायात की सुविधा मिलेगी। निगम ने पुल का प्रोजेक्ट स्थानीय निर्माण इकाई- एक को आवंटित किया। सपा सरकार में चहेते ठेकेदारों ने काम ले लिया और विभागीय मिलीभगत से मनमाने तरीके से काम शुरू किया। सात माह बाद ही यूपी में नई सरकार आ गई तब एक दूसरे पर जिम्मेदारी तय होने लगी। कुछ अफसर नई सरकार में भी चहेते बने हुए थे, इसलिए प्रोजेक्ट में कोई खास तेजी नहीं आई।
पिछले दिनों निगम मुख्यालय पर आयोजित समीक्षा बैठक में निर्माण इकाई- एक द्वारा बनाया जा रहे रामगंगा पुल के निर्माण कार्य की प्रगति धीमी पाई गई। समीक्षा में पाया गया कि रामगंगा प्रोजेक्ट पर स्थानीय अफसरों ने खर्च भरपूर कर दिया लेकिन काम आधा भी नहीं हुआ। बताया जाता है कि प्रोजेक्ट जुड़े इंजीनियरों ने भुगतान भी काम से ज्यादा करा दिए। इस मनमानी पर एमडी ने तीखी नाराजगी जताई और श्यामगंज फ्लाईओवर रिकार्ड समय में पूरा करने वाली इकाई दो को रामगंगा प्रोजेक्ट सौंप दिया। बताया जाता है कि सीएम बरेली आ रहे हैं वे 19,993 लाख रुपये के विकास कार्य जनता को सौंपेंगे, रामगंगा पुल का प्रोजेक्ट काफी पिछड़ने पर संभावित किसी कार्रवाई से बचने के लिए लापरवाह अफसर इस प्रोजेक्ट से अलग करने का फैसला लिया है।
इंफो:
रामगंगा नदी सेतु परियोजना
लागत 46 करोड़ रुपये
लंबाई 670 मीटर
लक्ष्य दिसंबर 2018
कार्य प्रगति 37 प्रतिशत
वर्जन:
रामगंगा पुल पर करीब 42 प्रतिशत काम हो गया है। बाढ़ आने आदि कारणों से काम में बाधा आती है। दिसंबर 19 तक इसे पूरा कर देंगे। प्रोजेक्ट छिनने की कोई जानकारी नहीं है। - ब्रजेंद्र कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, यूनिट- एक