बरेली। अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी अपनी उर्वरता खो रही है। कृषि विभाग की मृदा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, बरेली मंडल के 90 फीसदी से अधिक खेतों में नाइट्रोजन और जीवांश कार्बन की भारी कमी पाई गई है। समय रहते मिट्टी की सेहत सुधारने के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में उत्पादन घटने के साथ खेती की लागत भी बढ़ जाएगी।
मृदा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन में मंडल के चारों जिलों से 72,800 नमूने लेकर उनकी जांच की गई। इसमें बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर से 21-21 हजार और पीलीभीत से 9,800 सैंपल लिए गए थे। इनमें नाइट्रोजन 280 किलो प्रति हेक्टेयर से अधिक होना चाहिए, लेकिन बदायूं के सभी 21,000, बरेली के 20,967, शाहजहांपुर के 20,996 और पीलीभीत के 9,795 नमूनों में यह बेहद कम मिला।
जीवांश कार्बन का मानक 0.50 प्रतिशत से अधिक का है, लेकिन शाहजहांपुर के 20,405, बदायूं के 19,766, बरेली के 19,398 और पीलीभीत के 7,959 नमूनों में यह कम पाया गया। फॉस्फोरस का मानक 10-25 किलो प्रति हेक्टेयर होना चाहिए, पर बदायूं के 14,507, शाहजहांपुर के 13,888, बरेली के 11,103 और पीलीभीत के 6,208 नमूनों में यह मध्यम स्तर पर मिला।
पोटाश का स्तर भी चिंताजनक
जांच में पोटाश का स्तर भी चिंताजनक पाया गया है। इसका मानक 120-280 किलो प्रति हेक्टेयर है, लेकिन शाहजहांपुर के 20,274, बरेली के 18,854, बदायूं के 11,028 और पीलीभीत के 7,948 नमूनों में स्थिति मध्यम दर्ज की गई। जांच में सल्फर का स्तर ठीक पाया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पहले किसान गोबर की खाद, हरी खाद और फसल अवशेषों का अधिक उपयोग करते थे। इससे मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा संतुलित रहती थी। अब इनकी जगह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों ने ले ली है। इससे मिट्टी लगातार बंजर होने की ओर बढ़ रही है।
वर्जन
मंडल के चारों जिलों में अलग-अलग स्थानों के लिए गए 70 हजार से अधिक नमूनों की जांच की गई। इसमें रसायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी बंजर होने की ओर बढ़ रही है। इसे फिर उपजाऊ बनाने के लिए किसानों को फसल चक्र में बदलाव करना होगा और खेतों में जैविक खाद का उपयोग करना होगा। - नरेंद्रपाल, सहायक निदेशक, मृदा परीक्षण विभाग