बरेली। जेल में भाई-भाभी से मुलाकात के दौरान हालत बिगड़ने और मरने वाले आदेश तिवारी की दो महीने बाद ही शादी होने वाली थी। अब उनके घर में मातम है। पुलिस के रिकार्ड में आदेश तिवारी की मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान थी।
जिला अस्पताल की मोर्चरी पर आदेश तिवारी के परिजन बिलख रहे थे। उसकी मां सरस्वती व भाभी गौरी ने एसओजी पर उसे जानबूझकर फंसाने का आरोप लगाया। गौरी ने बताया कि आदेश सीधा साधा युवक था। पहले देहरादून पुलिस ने उस पर फर्जी केस लदवा दिए, अब बरेली एसओजी ने उसे फंसा दिया।
उन्होंने बताया कि आदेश की शादी तय हो गई थी और दो महीने बाद बरात जानी थी। घर में शादी की तैयारी तेजी से चल रही थी। सभी लोग खुश थे और खरीदारी में जुटे थे। अब उनके घर में मातम है। मां सरस्वती ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। इनमें सबसे बड़े अंशुल की शादी हो चुकी है। दूसरा बेटा आदेश और तीसरा अंकुुर है।
अकरम की दोस्ती में स्मैक के धंधे में उतरा आदेश
- आदेश तिवारी के परिवार का स्मैक के धंधे से कोई पुराना जुड़ाव नहीं है। सूत्र बताते हैं कि बुधवार को साथ में जेल भेजे गए अकरम की दोस्ती में आदेश इस धंधे से जुड़ा था। अकरम की उनासी चौराहे पर कार मैकेनिक की दुकान थी, वहीं आदेश कस्बे की दुकान पर मोबाइल रिपेयर करता था। अकरम कस्बे के नामी तस्कर नन्हे लंगड़ा का शागिर्द था। दरअसल आदेश के नाम व सरनेम की वजह से कोई उस पर शक नहीं करता था। चार साल पहले वह पहली बार देहरादून में स्मैक के साथ पकड़ा गया था।
सप्ताह भर से चल रहा खेल, अकरम ने ही पकड़वाए शातिर
फतेहगंज पश्चिमी। सूत्र बताते हैं कि पकड़धकड़ का सिलसिला करीब सप्ताह भर से चल रहा था। एसओजी ने सबसे पहले फतेहगंज पश्चिमी जाकर इमरान नाम के शख्स को पकड़ा। इमरान के सहारे टीम ने उसके भाई स्मैक तस्कर अकरम को पकड़ा। फिर अकरम से कॉल करवाकर आदेश व बाकी लोगों को बुलवाया। अंशुल ने भी इस बात की तस्दीक की कि अकरम ने कॉल की तो आदेश घर पर ही था, वह उसके बुलाने पर भरोसे में चला गया। मुख्तत्यार उर्फ गोला नाम के तस्कर को पकड़ने और छोड़ने का सिलसिला भी इसी दौरान का बताया जा रहा है। कुछ और संदिग्धों को पकड़ने छोड़ने के बाद एसओजी ने अधिकारियों को संभावित गुडवर्क की कहानी बता दी।