बरेली। शहर में शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की सामूहिक रूप से आराधना एक शताब्दी से भी पहले से होती आ रही है। बंगाली समाज ने इसकी शुरुआत की। समय के साथ अन्य शहरवासी भी उसी आस्था और उत्साह से मां की भक्ति में रम गए।
बरेली में सामूहिक रूप से दुर्गा पूजा की शुरुआत दिवंगत प्रतुल चंद गांगुली ने एक शताब्दी पहले शहर में रहने वाले अपने समाज के प्रतिष्ठित लोगों के साथ की थी। दिवंगत डॉ. एससी चटर्जी, अधिवक्ता एके मुखर्जी, पीएस गुहा आदि के सहयोग से झगड़ेवाली मठिया, बिहारीपुर में यह आयोजन किया गया।
इसके बाद रामपुर बाग स्थित दुर्गाबाड़ी में आयोजन हुआ। इसमें बंगाली समाज के लोग जुटकर पूजा-अर्चना करते थे। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जत नगर कॉलोनी के रोड नंबर चार स्थित मनोरंजन सदन में भी पंडाल बनाकर माता की पूजा-आराधना की गई। रेलवे कार्यालयों में काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी इस सदन में सपरिवार आकर मां की पूजा करते थे। इस आयोजन का संचालन दिवंगत बी चक्रवर्ती, एम चक्रवर्ती, एसबी कर्माकर, एससी कर्माकर और एनजी सरकार ने किया था।
ऐसे ही बरेली जंक्शन स्थित उत्तर रेलवे के मनोरंजन सदन में दिवंगत डॉ. पीबी राय, डॉ. अमित तरफदार, प्रो. आरएन मुखर्जी, यूके मित्रा आदि ने, इज्जत नगर के कृष्णा नगर स्थित कालीबाड़ी में दिवंगत पीके रखित, पीके कुंडू, जेएम मुखर्जी, आरसी कर्माकर आदि ने, कैंट के बीआई बाजार स्थित दुर्गाबाड़ी, चौपुला की पूर्वोत्तर रेलवे कॉलोनी स्थित मनोरंजन सदन में, इज्जत नगर के सामने स्थित दादू का मंदिर में व अन्य स्थानों पर पंडाल सजाकर लोगों ने सामूहिक दुर्गा पूजा का शुभारंभ किया। हालांकि चौपुला रेलवे कॉलोनी में निर्माण कार्य के कारण यहां का पंडाल अब मिनी बाइपास पर पहुंच गया है।
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षष्ठी से शुरू होते हैं आयोजनघरों में शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही कलश स्थापना कर दुर्गा पूजा शुरू हो जाती है। लेकिन, पंडालों और सार्वजनिक रूप से मुख्य आयोजन षष्ठी तिथि से शुरू होता है। विजय दशमी पर देवी की मूर्तियों के विसर्जन के साथ उत्सव को विराम दिया जाता है। श्रद्धालु गुलाल खेलते हैं और अगले वर्ष फिर दर्शन की कामना के साथ मां को विदा करते हैं। - ध्रुव चटर्जी, बरेली