पड़ोसिन को जलाकर मारने का आरोप सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश सैयद सरवर हुसैन रिजवी ने परतापुर जीवन सहाय के शमशेर उर्फ दिलीप, उसकी मां अख्तरी उर्फ मामी व भाभी रजिया को उम्र कैद व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अभियोजन की कहानी का विवरण देते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजपाल सिंह यादव ने बताया कि वादी रहीस खां ने 21अगस्त 2013 को थाना इज्जतनगर में रिपोर्ट दर्ज करायी जिसमें कहा गया कि गत दिन उनकी पत्नी सीमा खान का पड़ोसी शमशेर उर्फ दिलीप, रजिया पत्नी शेर मोहम्मद खां, शमशेर की मां अख्तरी उर्फ मामी से बच्चों को लेकर कहा सुनी हो गई। 21 अगस्त को भी इन लोगों से कहा सुनी हुई। मैं दोनों को समझाकर घर से करीब नौ बजे काम से चला गया। उसके पीछे नामजद तीनों लोग एकराय होकर घर में घुस आए और रहीस खां की पत्नी सीमा को पकड़ लिया और उसे जान से मारने की नियत से उस पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। तीनों ने निकल कर घर के बाहर से किबाड़ बंद कर दी और सीमा खान को जलता छोड़ आए। चीख पुकार पर मोहल्ला के तमाम लोग अपने घरों से निकल आए तथा धुंआ निकलता देख कर फोन पर रहीस खां को सूचना दी।
रहीस ने घर की किबाड़ खोलकर देखा तो सीमा पूरी तरह जली बेहोश पड़ी थी। ईशान अस्पताल में उपचार के दौरान उसने पूरी घटना बतायी। यहां नायब तहसीलदार दिग्विजय सिंह ने उसका मृत्यु पूर्व बयान लिया। बाद में एसआरएमएस में उपचार के दौरान 24 अगस्त को सीमा की मृत्यु हो गई। तीनों के खिलाफ भारतीय दंज संहिता की धारा 302 एवं 452 के तहत आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया गया जिसके विचारण के दौरान नौ गवाह पेश किए। अभियुक्तों की ओर से अपने बचाव में एक गवाह पेश किया गया। न्यायाधीश ने आरोप को संदेह से परे सिद्ध मानते हुए घर में घुसने के मामले में प्रत्येक को दो वर्ष की कैद व एक-एक हजार रुपये की सजा सुनाई। अर्थंदंड जमा किये जाने पर इस राशि में से 15 हजार रुपये वादी को दिये जाने की व्यवस्था की गई है।