बरेली। सरकारी स्कूलों में दाखिला लेकर नदारद हो जाने विद्यार्थियों के दरवाजे पर अब शिक्षा विभाग की टीम दस्तक देगी। उनसे स्कूल न आने के कारणों की जानकारी ली जाएगी। पढ़ाई फिर से शुरू करने के लिए जागरूक भी किया जाएगा।
डीआईओएस डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि कई छात्र-छात्राएं कागजों में नाम तो दर्ज करा लेते हैं, लेकिन निजी या पारिवारिक कारणों से कक्षा तक नहीं पहुंच पाते। कई बार बच्चे चाहकर भी मजबूरियों के चलते स्कूल नहीं आ पाते। ऐसे में विभाग अब केवल सूचना का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि शिक्षकों की टीमें खुद उन बच्चों के दरवाजे तक दस्तक देंगी। घर जाकर अभिभावकों से सीधा संवाद किया जाएगा और यह समझने की कोशिश की जाएगी कि बच्चा स्कूल क्यों नहीं आ रहा है।
विद्यार्थियों को वापस कक्षाओं तक लाने की जिम्मेदारी शिक्षकों और क्षेत्रीय अधिकारियों को सौंपी गई है। यदि किसी विद्यार्थी की पढ़ाई में आर्थिक तंगी या कोई सामाजिक समस्या आड़े आ रही है, तो विभाग उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाकर फिर से स्कूल से जोड़ने में मदद करेगा। संवाद