बरेली। पेरिस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम पदक की दहलीज पर पहुंच चुकी है। वहीं, शहर के मैदान सूने पड़े हैं। कभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का गढ़ रहे शहर में अब हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी सूख रही है। मैदान वीरान पड़े हैं। नेशनल तो दूर की बात, बीते कई वर्षों से शहर का कोई खिलाड़ी स्टेट लेवल पर भी अपना दबदबा कायम नहीं कर सका है। दरअसल, शहर में न तो ढंग के कोच हैं, न ही सुविधाएं। इससे खिलाड़ियों की भी हॉकी के प्रति रुचि कम हो रही है। स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलों इंडिया के तहत हॉकी की कोच हैं, जो अंडर-14 के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही हैं।
जिला हॉकी संघ के संयुक्त सचिव संजीव त्यागी ने बताया कि स्पोर्ट्स स्टेडियम में हॉकी का कोई कोच न होने के कारण ही खिलाड़ियों का रुझान कम हो रहा है। प्रतिभाएं निखर नहीं पा रही हैं। खिलाड़ी स्टोर्ट्स हॉस्टल या कॉलेज में जाने के इच्छुक नहीं हैं। छह साल पहले स्कूलों की ओर से हॉकी को बढ़ावा दिया जाता था, लेकिन अब स्कूलों ने भी इसमें दिलचस्पी लेना बंद कर दिया है।
बरेली कॉलेज का हॉकी मैदान बना जंगल
हॉकी के लिए मशहूर रहा बरेली कॉलेज का मैदान जंगल में तब्दील हो चुका है। यहां न तो कोई खिलाड़ी है, न ही कोच। मैदान में झाड़ियां उग चुकी हैं। लाइब्रेरी के पास बने इस मैदान को देखकर लगता है कि कई वर्षों से यहां कोई मैच नहीं खेला गया है।
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स्टेडियम में खेलो इंडिया हॉकी कैंप के तहत दो साल से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। कई खिलाड़ियों ने प्रतियोगिताएं खेली भी हैं। स्टेडियम में हॉकी के कोच नहीं हैं। - जितेंद्र यादव, आरएसओ