बरेली। भूमि संरक्षण विभाग की ओर से 22 करोड़ से कराए गए कामों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद लखनऊ से आई तीन सदस्यीय टीम ने दो दिनों तक पड़ताल की। टीम ने आठ गांवों में हुए कामों की जांच की। यह टीम प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र कुमार को रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद इसकी जांच एसआईटी से कराई जाएगी।
भूमि संरक्षण विभाग को वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) योजना के तहत जिले के 104 गांवों में मेड़बंदी, सिंचाई, पानी निकासी, कुआं खुदाई, समतलीकरण आदि के काम कराने लिए 22 करोड़ रुपये दिए गए थे।
विभाग की ओर से जो काम कराए गए उनमें मानकों की अनदेखी के आरोप लगे। कई किसानों के अलावा भाजपा के पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने भी इसकी शिकायत की।
इसकी जांच संयुक्त विकास आयुक्त प्रदीप कुमार ने टेक्निकल कमेटी से कराई थी। जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच टीम ने कराए गए कार्यों के अभिलेख मांगे तो तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी संजय कुमार ने उपलब्ध नहीं कराया।
ऐसे में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने इसकी जांच एसआईटी से कराने के लिए प्रमुख सचिव कृषि को पत्र लिखा था। एसआईटी की जांच से पहले प्रमुख सचिव ने लखनऊ के तीन अधिकारियों की टीम गठित कर जांच के लिए बरेली भेजा।
अपर निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली टीम में शामिल योगेंद्र प्रताप सिंह और विशाल सिंह ने छह और सात अगस्त को जांच की। टीम ने आंवला तहसील के गांव नौरंगपुर, खेड़ा, जैतपुर, शरीफपुर, पराउद्दीनपूर, भमोरा, कुंडारिया खुर्द, रामपुरा गांव में हुए कार्यों को देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली।
पूर्व विधायक राजेश मिश्रा ने बताया कि गांव किटोना, सेंधा, कुंडारिया इगलास, रामनगर, नौगवां ठाकुरान, हजरतपुर, मकरंदपुर, धरजीत आदि में हुए कार्यों में भारी अनियमितता की गई लेकिन टीम वहां पर नहीं गई।
टीम ने जय जगदम्बा, जय हनुमान, मोहन ट्रेडर्स, मां वैष्णो फर्म के बिल बाउचर भी मांगे लेकिन उप कृषि निदेशक कार्यालय के पटल सहायक ने उपलब्ध नहीं कराए। जांच टीम ने बताया कि वह प्रमुख सचिव को रिपोर्ट सौपेंगे। टीम शुक्रवार को लखनऊ चली गई।
जांच के दौरान संयुक्त कृषि निदेशक डीवी सिंह, उप निदेशक भूमि संरक्षण नीरजा सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी रश्मि शर्मा मौजूद रहीं। ब्यूरो