बरेली। स्त्री के सम्मान और अस्तित्व के लिए सवाल उठाते नाटक द्रौपदी का मंचन किया गया। यह नाटककार शशि भूषण ने लिखा है। थिएटर अड्डा में रंगालय एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी बरेली की ओर से खुशहाली सभागार में आयोजित थिएटर फेस्ट के दौरान मंगलवार को द्रौपदी को केवल पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, सम्मान और निर्णयों से जूझती हुई स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। स्त्री की अस्मिता, अन्याय, प्रतिशोध और उसके भीतर चलने वाले द्वंद्व को दर्शाया गया। अंत में द्रौपदी को हर उस स्त्री की आवाज दिखाया गया, जो सम्मान और अस्तित्व के लिए सवाल उठाती है। मंचन प्रयागराज की संस्था अभ्युदय ने दिव्या शुक्ला के निर्देशन में किया। उन्होंने ही द्रौपदी की भूमिका निभाई। दुशासन की भूमिका में अनूप श्रीवास्तव और सहयोगी कलाकार के रूप में आदर्श दुबे रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अनिल अग्रवाल व डॉ. विनोद पागरानी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। फेस्ट में शालिनी गुप्ता, अमीषा सक्सेना, शौर्य सक्सेना, सौमित अग्रवाल ने सहयोग किया। संयोजक शैलेंद्र सक्सेना के मुताबिक, बुधवार को कारवां थिएटर भोपाल की टीम नाटक ‘घर का ना घाट का’ मंचन करेगी।