हुनर किसी दौलत का मोहताज नहीं, लेकिन जब बात खिलाड़ी की हो तब बेहतर ट्रेनिंग, ट्रांसपोर्टेशन, खानपान आदि जरूरतों को पूरा करने के लिए यह जरूरी भी हो जाता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक तंगी बेड़ियां बनकर बढ़ते कदमों को रोकने लगती है। हालांकि कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो विपरीत परिस्थितियों का सामना कर कामयाबी की इबारत लिख रहे हैं। बस इन्हें जरूरत है सिस्टम के साथ की।
करगैना के रहने वाले आरिफ शाह जीआईसी में 11वीं के छात्र हैं और हैंडबॉल प्रतियोगिता में नेशनल तक अपना दम दिखा चुके हैं। आरिफ के पिता सलीम शाह पल्लेदारी करते हैं। माता गृहणी हैं। परिवार का इकलौता बेटा होने की वजह से पिता चाहते थे कि वह भी कुछ काम करे ताकि परिवार की आर्थिक तंगी दूर हो सके। वहीं आरिफ ने कुछ और ही ठान रखी थी। जीआईसी में पढ़ाई के दौरान आरिफ ने वॉलीबॉल, खो-खो और हैंडबॉल में शानदार प्रदर्शन किया।
आरिफ का प्रदर्शन जीआईसी के गेम टीचर नईम ने परखा। उन्होंने आरिफ को स्पोर्ट्स स्टेडियम में हैंडबॉल की ट्रेनिंग दिलानी शुरू की। जैसी उम्मीद थी ठीक वैसे ही आरिफ ने पहले ही साल में जिला, मंडल में विजेता बनकर 2018 में स्टेट लेवल की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और टीम को जीत दिलाई। इसके बाद उन्हें 2019 में तेलंगाना और जनवरी 2020 में दिल्ली में आयोजित नेशनल इंटर स्कूल हैंडबॉल प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला, जहां उन्होंने जबरदस्त प्रदर्शन से टीम को बेहतर स्कोर दिलाया।
आरिफ ने बताया कि पिता खेल से परिवार की जरूरतें पूरी नहीं होने की बात कहते हैं। इसलिए आए दिन वह खेल से दूर होने को कहते हैं। वहीं नईम का कहना है कि आरिफ में इंटरनेशनल तक खेलने की क्षमता है, लेकिन कुछ आर्थिक तंगी की वजह से उसके कदम ठिठक रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अगर खिलाड़ियों के लिए निशुल्क ट्रेनिंग, डायट, किट आदि की व्यवस्था कर दे तो देश का हुनर विदेशों से गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल कर सकता है।