बरेली। सरकारी स्कूलों में गिरते नामांकन की वजह से विलय की कवायद के बीच उच्च प्राथमिक विद्यालय करेली शैक्षणिक गुणवत्ता की मिसाल पेश कर रहा है। यह मंडल का पहला ऐसा स्कूल है, जहां एक ही छत के नीचे 1348 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह आंकड़ा शिक्षकों के समर्पण का प्रमाण है। इसने साबित किया है कि बेहतर सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता के दम पर सरकारी स्कूल भी निजी संस्थानों को टक्कर दे सकते हैं।
उच्च प्राथमिक विद्यालय करेली में 1348 विद्यार्थियों को संभालने के लिए 32 अनुभवी शिक्षकों की टीम तैनात है। हर शिक्षक अपने विषय में पारंगत हैं और पूरी निष्ठा से बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं। स्कूल में 18 कक्ष हैं। इनमें से 11 में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। पहली से पांचवीं तक हर कक्षा में 100 से अधिक बच्चे हैं। 6वीं, 7वीं और 8वीं की कक्षाएं अलग-अलग संचालित की जा रही हैं। प्रत्येक कक्षा में दो सौ से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बच्चों को डिजिटल युग के लिए तैयार करने के लिए एक अत्याधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) कक्ष है। इसमें सात कंप्यूटर लगे हैं।
तीन स्मार्ट क्लास, लर्निंग बाय डूइंग लैब भी
सीखने के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए विद्यालय में तीन स्मार्ट क्लास और एक ''''लर्निंग बाय डूइंग'''' प्रयोगशाला भी है। यहां किताबी ज्ञान के अलावा बच्चे व्यावहारिक रूप से भी सीखते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। मिड-डे मील बनाने के लिए पांच रसोइया तैनात हैं। स्कूल परिसर में बच्चों के लिए एक ओपन जिम भी है जो उन्हें व्यायाम के लिए प्रोत्साहित करता है। यह स्कूल पूरे बेसिक शिक्षा विभाग के लिए एक 'मॉडल' है। यह दिखाता है कि कैसे उचित योजना और समर्पण के बूते सरकारी स्कूल भी बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं। संवाद
स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ाने में सभी शिक्षकों का योगदान रहता है। हम बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास करते हैं। - संजीव सक्सेना, प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय करेली
साल-दर-साल बढ़े विद्यार्थी
वर्ष विद्यार्थी
2021 1056
2022 1166
2023 1220
2024 1348
(नोट : 2025 के आंकड़े उपलब्ध नहीं।)