दमखोदा ब्लाक में मनरेगा के घपले का एक और सच सामने आया है। यहां के गांव बैकरनंदा मे पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान धन तो निकला, मगर विकास नहीं हुआ। यहां के विकास के लिए मिली रकम का पूर्व प्रधान व मनरेगा घपले में फंसे पंचायत सचिव करन सिंह ने बंदरबाँट कर लिया गया।
पंचायत चुनाव से पहले बैकरनन्दा व बैकरशाहपुर दोनों गांवों को दोनों मिलाकर एक ही ग्राम पंचायत थी। इस बार से दोनों ग्राम पंचायत अलग-अलग हो गईं हैं। गांव मे घुसते ही विकास की सच्चाई पता चल जाती है। सबसे बुरा हाल बैकरनन्दा का है। कीचड़ से बजबजाते रास्ते से पता चलता है,कि पिछले साल यहां विकास हुआ ही नहीं।
--- ग्रामीणों के आरोप।
धर्मेन्द्र ने बताया कि उनके पिता मंगलसेन ने पूर्व प्रधान से विकास का ब्यौरा माँगा था, मगर कोई जानकारी नहीं दी। बाबूशाह, जाकिर, मोहन सरूप, तालीम ने बताया बैरनन्दा में विकास की एक ईंट तक नहीं लगी है। बैकरशाहपुर के चेतराम का कहना है कि ,बैकरशाहपुर में भी विकास नहीं हुआ है। यहां तालाबों का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। पूर्व प्रधान व सचिव ने अपना ही विकास किया है। ग्रामीणों का खुला आरोप है,कि कई रास्ते ऐसे हैं, जहां कागजों पर सड़क पड़ गई है ।
प्रधान ने कहा, सिर्फ कागज भरे गए
गांव बैरनन्दा की वर्तमान प्रधान राजेश्वरी देवी का कहना है,कि पूर्व प्रधान व पंचायत सचिव ने गांव में कोई विकास नहीं किया। दोनों ने सिर्फ अपना ही विकास किया। हमारे गांव मे जो सड़क पड़ी है, वह जिला पंचायत से है। कागजों में क्या दिखाया गया है, जिसकी समीक्षा कर अफसरों को जांच के लिए लिखेंगे।
पूर्व प्रधान ने कहा खूब करे विकास।
पूर्व प्रधान चमन कुमारी का कहना है कि जितना धन मिला उससे बहुत काम कराए हैं। आरोप निराधार हैं। हमारे गांव की खबर मत छापना। बाकी हम आपसे मिल लेंगे।