फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक गाड़ी पर रोज 20 क्विंटल मेडिकल वेस्ट उठाने का जिम्मा

Sun, 05 Nov 2017 02:04 AM IST
बरेली।
विज्ञापन
बंद कंपनी
विज्ञापन

विज्ञापन
मेडिकल वेस्ट निस्तारण में हो रहे खेल को आठ महीना पहले स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने पकड़ा था। सीबीगंज स्थित एजेंसी पर न तो गाड़ियों की लॉगबुक थी और न ही कूड़े को नष्ट करने वाली ऑटोक्लेव मशीन की जानकारी। इस पर एजेंसी को नोटिस तो जारी किया गया, लेकिन फिर दोबारा एजेंसी का काम नहीं देखा गया। शनिवार को मात्र चार गाड़ियां ही एजेंसी पर अस्पतालाें से कूड़ा लेकर पहुंची। कुछ गाड़ियां बाहरी जिलों से आई थीं। बरेली में सिर्फ एक गाड़ी ही औसतन 20 क्विंटल कूड़ा उठा रही है।
इनविरॉड मेडिकेयर एजेंसी प्रति बेड के हिसाब से अस्पतालाें से मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का शुल्क लेती है। प्रति बेड 80 रुपये के हिसाब से अस्पताल प्रबंधन अपने कूड़े का एजेंसी से निस्तारण कराते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के अस्पतालों में करीब 8000 बेड हैं। अगर एक बेड से 250 ग्राम कूड़े का औसत माना जाए तो करीब दो हजार किलोग्राम कूड़ा एक दिन में पूरे जिले से निकल रहा है। इसे उठाने के लिए इनविरॉड की ओर से जिले में सिर्फ एक गाड़ी लगाई गई है। एजेंसी की बाकी तीन गाड़ियां बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर और रामपुर से कूड़ा लाती हैं। हालांकि एजेंसी के पास छह गाड़ियां हैं लेकिन चलाई चार ही जा रही हैं। अगर सिर्फ बरेली जिले से ही करीब दो हजार किलोग्राम कूड़ा रोज निकल रहा है तो ऑटोक्लेव मशीन रोजाना चलनी चाहिए लेकिन यह भी कभी-कभी ही चलती है। कितना कूड़ा एजेंसी तक पहुंच रहा है, इसका भी कोई रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
विज्ञापन


सिर्फ एक एजेंसी के भरोसे है स्वास्थ्य विभाग 
नगर निगम की ओर से पहले सिनर्जी ने सराय तल्फी में प्लांट लगाया था लेकिन मानक पूरे न होने पर बंद कर दिया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इससे कूड़ा निस्तारण का अधिकार भी छीन लिया। इनविरॉड निजी एजेंसी है। अब इसे अस्पतालाें का कूड़ा निस्तारण करने की अनुमति दी गई है। अब एकमात्र एजेंसी होने से स्वास्थ्य विभाग भी लाचार बना हुआ है। एजेंसी की शिकायतें भी खूब हो रही हैं। 

यह मिली थीं खामियां 
कूड़े को रीसाइकिल करने वाली ऑटोक्लेव मशीन बंद थी।
ऑटोक्लेव मशीन 15-15 दिन के अंतराल पर चलाई जा रही है।
छह गाड़ियों से 500 अस्पतालाें का कूड़ा ढोया जा रहा है।
गाड़ियों का कोई रूट चार्ट नहीं मिला। 
लॉगबुक में मशीन चलाने की एंट्री नहीं थी। 



इसकी कोई जानकारी नहीं है कि कितना कूड़ा शहर के अस्पतालों से उठाकर एजेंसी के प्लांट तक पहुंच रहा है। जो खामियां मिली थीं, उन पर नोटिस भी दिया गया था। बाद में जांच नहीं की गई। 
विज्ञापन

- डॉ. अशोक कुमार, मेडिकल वेस्ट निस्तारण प्रभारी 

एक ही एजेंसी होने से अस्पतालों को इसकी मनमानी भी झेलनी पड़ती है। कई दिनाें तक तो कूड़ा उठाने ही नहीं आते हैं। आईएमए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर रही है। 
- डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, अध्यक्ष, आईएमए 


सुबह एक बार गाड़ी आकर कूड़ा ले जाती है। एजेंसी की काफी मनमानी रहती है। कभी-कभी तो क ई दिन तक कूड़ा नहीं उठता है। 
- डॉ. विनोद पागरानी, संचालक, निजी अस्पताल 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें