चौपुला के आगे गिहार बस्ती की आबादी करीब 2500 है। यहां रहने वाले लोगाें के पास पक्के मकान नहीं हैं। घराें के पुरुष रिक्शा चलाते हैं या फिर मजदूरी करते हैं। महिलाएं भी कुछ काम करके जीविका चला रही हैं। लेकिन सरकार की नजर में ये सभी गरीबी रेखा से ऊपर हैं। इनका एपीएल कार्ड बना हुआ था। पिछली सरकार में जब नए राशन कार्ड बनना शुरू हुए तो सभी ने आवेदन किया, लेकिन अभी तक आधे से अधिक के कार्ड बनकर नहीं आए हैं। इससे कोटेदारों ने खूब फायदा उठाया। आवेदन भरने के बाद राशन कार्ड के रूप में जो पर्चे मिले उस पर जमकर राशन की लूट हुई।
गिहार बस्ती के लोग बताते हैं कि उनको नहीं पता था कि इस बार कितने किलोग्राम राशन एक कार्ड पर मिल रहा है। इसलिए कभी डेढ़ किलो चावल तो कभी दो किलो गेहूं मिल जाता था। जब कुछ लोगाें के पास कार्ड आया तो उसमें साफ लिखा है कि पांच किलोग्राम राशन एक यूनिट पर मिलेगा। जिसमें दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं है। अब कोटेदार से इतना राशन मांगा जाता है। यहां बने 200 घर हैं। इनमें से अभी तक करीब 50 से 60 लोगों को ही कार्ड मिले हैं। रियाज अहमद, वसीम और अबरार कोटेदार के पास उनका राशन मिलता है। कुछ दुकान तो मात्र 800 ग्राम ही चीनी देते हैं। होटल में काम करने वाले रोहित ने बताया कि अगर आपको दुकानाें पर राशन लेना है तो काम से छुट्टी लेनी पड़ती है।
लोग बोले--
पहले मेरा एपीएल कार्ड बना है। पांच किलो राशन पूरा नहीं मिलता है।- राधा
आवेदन कर दिया है लेकिन अभी तक कार्ड बनकर नहीं आया है। पर्चे पर कितना राशन मिलता है जानकारी नहीं। - राम आसरे
जब कार्ड नहीं था तो आधा राशन मिलता था, अब कार्ड मिल गया है तो पूरा राशन मिलता है। - कलावती
लोकवाणी से 80 रुपए देकर अपना फार्म भरवाया था। कार्ड बना नहीं है, बाहर से राशन खरीदना पड़ रहा है। - बंटी