नाबालिग बच्चों के मामलों में फैसला करने को बनी बाल कल्याण समिति पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। बुधवार को भोजीपुरा से एक लड़की को लेकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने आए दरोगा ने फोन करके दफ्तर खुलवाने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुला। दरोगा जी को इसके बाद बिना कार्रवाई के ही वापस लौटना पड़ा।
बदायूं रोड पर करगैना में एक रिटायर दरोगा के घर में बाल कल्याण समिति का दफ्तर है। शासन ने नाबालिग बच्चों को लेकर फैसला करने के लिए समिति को न्यायिक अधिकार दे रखे हैं। चेयरपर्सन के तौर पर यहां शीला सिंह हैं। इनके अलावा मंगलसेन भगत, देव शर्मा यजुर्वेदी, पूजा अग्रवाल तीन सदस्य हैं। थाना सुभाषनगर के मोहल्ला मढीनाथ की रहने वाली शांति देवी के बेटे को आपरेशन मुस्कान के तहत टीम ने पकड़कर बाल आश्रम गृह में रख दिया था। वह अपने बेटे को लेने के लिए कई दिन से समिति के दफ्तर के चक्कर काट रही है। बुधवार को भी वह अपने परिवार के लोगों के साथ वहां पहुंची, लेकिन बाल कल्याण समिति के दफ्तर में ताला लटका मिला। यही हाल भोजीपुरा के दरोगा सुबोध कुमार का था। दोनों की परेशान होकर लौट गए। सीडब्ल्यूसी की चैयरपर्सन शीला सिंह का कहना है कि बीमारी की वजह से वह पिछले दो दिन से छुट्टी हैं। समिति के सदस्य मंगलसेन भगत से दरोगा सुबोध कुमार की बात हुई होगी। सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीन दिन दफ्तर खुलता है। समिति के सदस्यों की ही दफ्तर खोलने की जिम्मेदारी थी।