बरेली। पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम लागू किया जा चुका है, लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की 35 लाख की आबादी अभी भी भगवान भरोसे है। उसमें कुत्तों की दहशत बरकरार है। लोग अभी भी पूरी तरह से गरिमापूर्ण, निडर और सुरक्षित जीवन जीने के अधिकार से दूर है। प्रशासकों के मुताबिक, छोटे निकायों को एबीसी कार्यक्रम (कुत्तों के बधियाकरण और टीकाकरण) के लिए बजट ही नहीं मिलता है, जिससे उन क्षेत्रों में कुत्ते पकड़वाने के लिए कोई अभियान ही नहीं चलाया जाता है। सीएचसी से प्राप्त आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों के काटने के 2,166 मामले प्रतिमाह सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों में आए कुत्तों के काटने के मामले -
शीशगढ़ सीएचसी - 370 मरीज (छह माह)
मीरगंज सीएचसी - 7,480 (20-25 मरीज रोजाना) (छह माह)
फतेहगंज पूर्वी सीएचसी - 260 (छह माह)
क्योलड़िया सीएचसी - 1,101 (छह माह)
रामनगर पीएचसी - 1,622 (छह माह)
रिठौरा सीएचसी - 127 (जनवरी से अबतक)
आंवला सीएचसी - 3,177 (जनवरी से अबतक)
मझगवां सीएचसी - 710 (जनवरी से अबतक)
नवाबगंज सीएचसी - 1,621 (फरवरी से अबतक)
सिरौली पीएचसी - रोजाना 40-50
00000000
नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों को नहीं मिलता है बजट
शीशगढ़ के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि कुत्ते पकड़वाने का कोई निर्देश नहीं है। नगर पंचायत मीरगंज की ईओ प्रियंका ने कहा, हमारे यहां कोई बजट नहीं है, न ही आदेश मिला है। नगर पंचायत फतेहगंज पूर्वी के ईओ राजन नाथ तिवारी ने बताया कि नगर पंचायत में इसका बजट नहीं है। नगर और ग्राम पंचायतों में एबीसी सेंटर नहीं होते हैं। बिलपुर ग्राम पंचायत सचिव अमन गंगवार ने बताया कि कुत्ते-बंदर पकड़वाने के लिए कोई बजट नहीं आता है। नवाबगंज नगर पालिका परिषद के ईओ आर आर अंबेश ने बताया कि नगर पालिका में कुत्ते पकड़ने के लिए बजट नहीं आता है। बजट भी नहीं मिलता है। नगर निगम स्तर पर है, नगर पालिका स्तर पर कार्यक्रम नहीं चलाया जाता है । रिठौरा के ईओ अंकित कुमार ने बताया कि नगर पंचायत में कुत्ते पकड़वाने के लिए बजट नहीं मिलता है। पिछले दो साल से कुत्तों को पकड़ने का कोई अभियान नहीं चलाया गया है। आंवला नगर पालिका परिषद के ईओ जितेंद्र कुमार ने बताया कि कुत्ते पकड़वाने के लिए कोई बजट नहीं मिला है इसलिए अभियान भी नहीं चलाया गया है। नगर पंचायत सिरौली के ईओ राजन नाथ तिवारी ने बताया कि एबीसी के लिए बजट नहीं मिलता है। प्रदेश के बड़े निकायों को मिलता है।