श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए बरेली जंक्शन के बाहर खड़ीं बसें।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
बरेली। साबरमती स्टेशन तक श्रमिकों को लेकर गुजरात स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस पहुंची। गोरखपुर के महेश ने बताया कि वह सूरत की धागा मिल में काम करते थे। साबरमती स्टेशन से पहले ही बस में घुसे कुछ लोगों ने उनसे बरेली तक का किराया वसूलना शुरू कर दिया। श्रमिकों से 525 रुपये लेकर बरेली का टिकट दिया गया। एक मजदूर ने कहा कि बरेली का किराया 320 रुपये बताकर विरोध किया तो उसे हड़का दिया। महाराजगंज के केदारनाथ ने बताया कि एक हजार रुपये उनके पास थे जो सारे किराये में चले गए। उन्होंने बताया कि एक मजदूर ने पैसे नहीं दिए तो उसे स्टेशन से पहले ही बस से उतार दिया गया। प्लेटफार्म से भी अंदर नहीं घुसने दिया गया।
स्टेशन से एक लंच पैकेट और पानी की बोतल दी, फिर न पूछा
श्रमिकों की जेबें तो किराया देने में ही खाली हो गईं। साबरमती से सोमवार रात 11 बजे के बाद जब ट्रेन चली तो स्टेशन पर एक लंच पैकेट और पानी की बोतल उन्हें दी गईं। फिर रास्ते भर खाने को नहीं पूछा गया। महिला और बच्चों का भूख से बुरा हाल हो गया। यहां जंक्शन पर भी खाना नहीं मिला।
अंग्रेजी में थी लिस्ट.. अटके लेखपाल
साबरमती स्टेशन से आने वाले यात्रियों की लिस्ट साबरमती प्रशासन ने बरेली के डीएम को भेज दी थी। सुबह 11 बजे यह लिस्ट लेखपालों को दे दी गईं लेकिन इसमें सारे नाम अंग्रेजी में थे जिसे समझने में लेखपालों को काफी दिक्कत हुई।
ट्रेन में मथुरा, कासगंज और बदायूं के भी यात्री थे
साबरमती से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में आगरा, मथुरा, हाथरस, कासगंज आदि शहरों के यात्री थे। ट्रेन भी अधिकांश इन्हीं स्टेशनों से होते हुए आई थी, लेकिन किसी भी यात्री को रास्ते में नहीं उतारा गया। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन ने इन स्टेशनों पर यात्रियों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था ही नहीं की थी। न ही वहां बसों का ही इंतजाम था, जिससे यात्रियों को सीधे बरेली लाया गया। इनमें आजमगढ़, मेरठ, रामपुर, मुरादाबाद, कुशीनगर समेत प्रदेश के सभी शहरों के लोग थे जिनको बसों से उनके शहर भेजा गया।