यूं तो बांध बनाने के इस महायज्ञ में दो जिलों के करीब 80 गांवों की सहभागिता रही लेकिन अगर किसी एक गांव को इसका श्रेय देना चाहें तो कनकपुरी का नाम आएगा। सबसे पहले यहीं के लोगों ने इसके लिए पहल की थी। किसान नेता जयदीप सिंह बरार ने मंच से कहा भी कि इस बांध की वास्तविक नींव तो कनकपुरी से रखी गई। इस गांव के पाती राम ने बार बार उनसे बांध के निर्माण के लिए कहा था। पाती राम अब दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी बात हमेशा याद आती रही।
तीन जून को शीशगढ़ के व्यापारियों और किसानों ने बहेड़ी की मंडी समिति से पैदल यात्रा निकालकर एसडीएम को बांध निर्माण को ज्ञापन दिया था। जब शासन प्रशासन से कुछ मदद की आस नहीं लगी तो गांव-गांव गली-गली जाकर चंदा मांगा गया। एक रिटायर्ड कर्नल ने इसका विरोध किया। नहर और नदिया बंद हो जाने से एक बड़े हिस्से पर वह 27 साल से खेती कर रहे थे। बरार ने कहा कि अब कर्नल उस जमीन को खुद ही खुदवा दें तो इससे बडा पुण्य का काम कोई नहीं होगा।
...और इस तरह बन ही गया बांध
बहेड़ी। खमरिया बांध 1920 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बना था। इस बांध से कई नहरें और गूलें कई गांवों तक पानी ले जाती थी। 1936 में आई बाढ़ में पक्का बांध टूट गया। इसके बाद 1989 तक यहां कच्चा बांध बनाया जाता रहा। लेकिन इसके बाद बरेली और रामपुर जिले की धरती बंजर होकर रह गई। तब से ग्रामीण तमाम सरकारों को ज्ञापन देकर थक गए। 1964 में तत्कालीन सिंचाई मंत्री रहे राममूर्ति लाल गुप्ता ने एक्वाडक (सैफन) का निर्माण कराया था। जिस पर एक पुल भी बनाया गया ताकि ग्रामीण इसके जरिए आवाजाही कर सके। करीब 150 फिट लंबे इस सैफन के जरिए बांध में भरे जाने वाले पानी की माप का काम भी होता था। 25 फिट से ऊपर पानी भरने पर बांध का पानी निकालने को फाटक खोल दिए जाते थे। किसान नेता जयदीप सिंह बरार ने किसान कल्याण समिति बनाकर लोगों को जोड़ा। पहले टेहरा बांध का निर्माण किया फिर खमरिया बांध कार सेवा से बना दिया।
इन गांवों को होगा फायदा
बहेड़ी तहसील के 12 गांव, मीरंगज तहसील के 48 गांव और रामपुर जिले के 20 गांवों की असिंचित जमीन को पानी मिलेगा। बल्ली नहर को इस बांध से जोड़कर बरेली जिले के गांवों को पानी मिलेगा जबकि ढौरी नदी से रामपुर जिले के गांवों को फायदा होगा। बहेड़ी के मोहम्मदपुर सराय, पिपरा, ढकिया ठाकुरान, सहपुरा, मनकरा, कनकपुरी, कैमरिया, भौता, पंडरी, कुतुबपुर, न्यामतपुर, तिगरी और मीरजंग तहसील के जिया नगला, लखा, बिसलपुर,बल्ली, रघुनाथपुर, ढकिया, लखीमपुर, कमालपुर, मीरपुर, धर्मपुरा आदि गांवों के किसान इससे लाभान्वित होंगे। रामपुर जिले के खजुरिया खुर्द, धावनी बुजुर्ग, कंचनपुर, पनवडिया, हुसैनगंज, इटंगा बैरमनगर, ,जौरासी, कायमगंज, ऊधमपुर, खजुरियाकला, करसौला, कनकपुर, इश्वरपुर, मंसूरपुर, सिसौना, उल्हैतापुर शामिल हैं।
रिटायर्ड कर्नल की बात पर भड़के किसान
पिपलिया विजय नगर के रहने वाले किसान और रिटायर्ड कर्नल गुरदेव सिंह सोमवार को एसडीएम बिलासपुर दुर्गा शंकर गुप्त के साथ बांध पर पहुंचे। उन्होंने भविष्य में इस बांध से जनहानि की आशंका जताई। एसडीएम बिलासपुर ने कर्नल के आशंकाओं का गलत करार किया और कहा कि रामपुर के डीएम अमित किशोर ने किसानों को पूरी मदद का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग ढयोरी नदी की जमीन कब्जा किए हुए हैं तो उन्हें कब्जा छोड़ना पडेगा। इसकी नहर विभाग से जांच भी कराई जा रही है। एसडीएम बहेड़ी कुंवर पंकज ने भी कहा कि इस नेक काम में कर्नल को किसानों का सहयोग करना चाहिए था।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने बांध के निर्माण में एक लाख का चंदा दिया है और एक जेसीबी मशीन का खर्च भी वहन किया जा रहा है। मैंने भी अपनी ओर से गुप्त दान दिया तथा कारसेवा की है। इस नेक से जयदीप सिंह बरार ने क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाकर रख दी है।
-सरदार जैल सिंह, सांसद प्रतिनिधि
बरेली और रामपुर की 80 गांव की हजारों एकड़ असिंचित जमीन को पानी मिलेगा। शासन प्रशासन तक ज्ञापन देते देते थक गए थे लेकिन शायद बरार साहब सहारा बनकर हमारे सामने आए हैं।
- सुखवीर सिंह ग्राम प्रधान खमरिया।
किसानों ने नेक काम किया है। मेरा मन काफी दिनों से विचलित था कि मैं खुद बांध पर जाकर कारसेवा करूं। बरार साहब की अगुवाई में किसानों ने कारसेवा कर बांध बनाकर एक मिसाल कायम की है। उनके इस जज्बे को मैं सलाम करता हूं।
-कुंवर पंकज एसडीएम बहेड़ी।