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बरेली: आसान नहीं शिवालयों की राह, रोड़े लेंगे शिवभक्तों का इम्तिहान

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बरेली। एक दिन बाद महाशिवरात्रि है। नाथ मंदिरों की ओर जाने वाले मार्ग पर गड्ढे शिवभक्तों का इम्तिहान लेंगे। जब श्रद्धालु महादेव के जलाभिषेक के लिए नंगे पांव निकलेंगे, यह रोड़े उनको चुभेंगे। अभी तक प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। यह बात दीगर है कि सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने का दम काफी समय से भरा जा रहा है। प्रतिवर्ष इस पर लाखों रुपये खर्च भी हो रहे हैं, लेकिन सड़कों की दशा नहीं सुधर रही है। कैंट स्थित धोपेश्वर नाथ मंदिर जाना हो या फिर सुभाषनगर के तपेश्वर नाथ मंदिर में दर्शन करना हो, आपका सामना बदहाल सड़कों से अवश्य होगा। त्योहार पर श्रद्धालुओं के लिए यह गड्ढे मुसीबत बनेंगे।-
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सुभाषनगर पुलिया से तपेश्वर नाथ मंंदिर तक गड्ढे ही गड्ढे
श्री तपेश्वर नाथ मंदिर में महाशिवरात्रि पर भक्तों का तांता लगा रहता है। सुभाषनगर पुलिया से मंदिर तक का रास्ता खस्ताहाल है। कई गड्ढे हैं। गड्ढों में पानी भर जाता है तो आने-जाने में जोखिम होता है। लोग संभलकर न चलें तो हादसा हो सकता है।

त्रिवटीनाथ मंदिर की राह में बिखरे रोड़े
प्रेमनगर स्थित त्रिवटीनाथ मंदिर में नंगे पांव दर्शन के लिए जाना मुश्किल होगा, क्योंकि सड़क पर रोड़े बिखरे हुए हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि महाशिवरात्रि से पहले मरम्मत करा दी जाती तो भक्तों को राहत मिलती, पर जिम्मेदारों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
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अलखनाथ मंदिर का रास्ता भी खस्ताहाल
अलखनाथ मंदिर जाने के लिए भी रास्ता ठीक नहीं है। किला क्रॉसिंग से हॉर्टमैन पुल तक सीवर लाइन के लिए खोदाई की गई थी। तब से ही सड़क की हालत खराब है। मंदिर में रोजाना श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। शिवरात्रि पर मंदिर आने-जाने वाले भक्त और ज्यादा परेशान होंगे।
काफी समय से टूटा पड़ा है वनखंडीनाथ मंदिर का मुख्य मार्ग
वनखंडीनाथ मंदिर का मुख्य मार्ग काफी समय से टूटा है। सड़क उखड़ने से पैरों में रोड़े चुभ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि त्योहार से पहले सड़क बन जाती तो आने जाने में सहूलियत होती। भक्तों को तकलीफ नहीं होती।
पशुपतिनाथ मंदिर के रास्ते में होता है जलभराव
पशुपतिनाथ मंदिर के लिए विश्वविद्यालय से होकर जो रास्ता गया है, उसमें सात सौ मीटर हिस्सा बेहद खराब है। सामान्य दिनों में गडढों में जलभराव हो जाता है। लोग इनसे बचकर निकलते हैं। सड़क को ठीक कराए जाने के लिए क्षेत्रीय लोगों ने कई बार मांग उठाई पर नतीजा शून्य ही रहा।
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