नगर निगम की वर्तमान टैक्स दराें को लेकर हाईकोर्ट का फैसला भले ही राहत भरा समझा जा रहा हो, लेकिन यह मुसीबत बढ़ा भी सकता है। पूर्ण निर्णय आना बाकी है और इधर बहस शुरू हो गई है कि अब नई सूची बनने तक किस दर से कर वसूली होगी। नगर निगम के एक अधिकारी द्वारा ऐसे में पुरानी बढ़ी दरें लागू करने के बात से हलचल मची है। हालांकि नगर आयुक्त का कहना है अभी इस बारे में कहना जल्दबाजी होगा। कोर्ट नई सूची बनाकर नई दरें लागू करने को कह सकता है। इस आधार पर जल्द लागू हुए डीएम सर्किल रेट से अगर नई दरें तय की जाती हैं तब भी यह ज्यादा ही होगा। वहीं, उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के मुताबिक अगर विधि न्यायालय के आदेश पर नई निर्धारण सूची प्रभावी न हो सके तो पुरानी निर्धारण सूची ही बनी रहेगी। अगर पुरानी सूची पर दरें वसूलेंगे तो यह वर्तमान दर से भी अधिक है।
वर्ष 2014-15 और 2015-16 की दराें को
वर्ष 2014 अप्रैल में नगर निगम ने टैक्सी की पुरानी दरें रिवाइज करके नई दरें लागू की थी। इसमें करदाताओं के पुराने टैक्स बिलों में 10 से 25 गुना तक बढ़ोत्तरी हो गई। उस समय यह 3.50 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से थी। जिसे बोर्ड के विरोध के बाद भी लागू किया था। वर्ष 2015- 16 में नई दरें लाई गई। इसमें 25 फीसदी की कमी की गई और दर 2.80 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से लागू की गई। इस समय इसी दर से वसूली हो रही है।
- अधिनियम तो यह कहता है
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 के मुताबिक किसी न्यायालय के किसी आदेश या निर्णय के परिणामस्वरूप नई निर्धारण सूची या उसका कोई भाग प्रभावी न हो सकता हो तो ऐसे आदेश या निर्णय के अधीन रहते हुए पुरानी निर्धारण सूची या उसक ा तद्नुरूप भाग प्रभावी बना रहा समझा जाएगा।
वर्जन--
मैने अभी तक कोर्ट का पूरा आदेश नहीं पढ़ा है। जनता पर किसी भी तरह का बोझ नहीं डाला जाएगा। अधिनियम पर भी चर्चा होगी।
डॉ. अरुण कुमार, विधायक
पहले कोर्ट का आदेश प्राप्त हो जाए उसी के अनुसार कार्य किया जाएगा। वर्तमान दर रोकना होगा तो रोकेंगे। नई दर लागू होगी या पुरानी दर इस पर कोई बात अभी नहीं की जा सकती।
शीलधर यादव, नगर आयुक्त
अगर पुरानी दर से टैक्स वसूली होती है तो टैक्स जमा कर चुकी जनता को इससे दूर रखा जाएगा। कोशिश रहेगी कि मार्च 2016 तक जनता पर किसी भी तरह का अतिरिक्त भार न पड़े।
राजेश अग्र्रवाल, सपा पार्षद दल के नेता
पूर्ण फैसला चार से पांच दिन में आएगा। फिलहाल वर्तमान दर को निरस्त कर दिया गया है। नई लिस्ट विधि के अनुसार बने। पुरानी दरें भी निगम लागू नहीं कर सकता है।
नन्हें बाबू, मामले के वकील, हाईकोर्ट
- टैक्स का हाल
शहर में आबादी- 11 लाख
कर दायरे में- डेढ़ लाख
करदाता- 45 हजार
सत्र वसूली छूट
2013-14 20 करोड़ कोई छूट नहीं
2014-15 22 करोड़ कोई छूट नहीं
2015-16 24.5 करोड़ 10 फीसदी छूट व दरें कम
2016-17 10 करोड़ 15 फीसदी छूट
(नोट- वर्ष 2016-17 में 10 करोड़ रुपये चार माह में आए हैं। यह 2.80 की दर से 15 फीसदी छूट के साथ वसूला गया है। जबकि 2014- 15 में दर 3.50 थी।)