रुहेलखंड क्षेत्र के किसानों को अपने खेत की बीमारियों का पता लगाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। वह अपने मोबाइल पर ही इसका पता लगा सकेगे। इतना ही नहीं उस बीमारी को कैसे खत्म कर सकते हैं इसकी भी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए बरेली कॉलेज के जुलॉजी विभाग के प्रोफेसर रुहेलखंड रीजन की जमीन का सर्वे कर एक मोबाइल एप डेवलप करने जा रहे हैं। इसके लिए उनको यूजीसी ने प्रोजेक्ट मिल गया है। इसका बजट भी 2.85 लाख रुपये जारी हो गया है। सर्वे का कार्य भी जल्द शुरू हो जाएगा।
डॉ. राजेन्द्र सिंह के अनुसार किसान भी डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं। किसानों के हाथों में भी स्मार्टफोन आ चुके हैं। अब जरूरत है उस सुविधा का सही इस्तेमाल करने का। किसानों को मोबाइल एप से ही खेतों में लगने वाली बीमारी और उसके समाधान बताने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है। यूजीसी ने इसके लिए बजट भी जारी कर दिया है। जियो स्पेशियल मॉडलिंग ऑफ प्लांट निमेटोड ऑफ वेस्टर्न उत्तर प्रदेश के तहत रुहेलखंड क्षेत्र की जमीन का सर्वे करेंगे। फसलों में कौन-कौन सी बीमारी हमारे क्षेत्र में हैं और उसका जैविक तकनीक से कैसे समाधान कर सकते हैं इसकी पूरी जानकारी मोबाइल एप में अपलोड करेंगे। किसान अपने मोबाइल में यह एप अपलोड करके इसका फायदा ले सकेगा। बता दें कि डॉ. राजेंद्र सिंह पादप कृमियों को जैविक तरीके से खत्म करने के लिए कारगर बॉयोपेस्टीसाइड खोज चुके हैं। बाजार में मौजूद बॉयोपेस्टीसाइड की तुलना में बसाका से बने पेस्टीसाइड से पादप कृमियों को 30-40 प्रतिशत तेजी से खत्म किया जा सकता है।