बरेली। सर्दी की देर से आयी बारिश से जहां पारा सामान्य से नीचे आ गया, वहीं इस बारिश ने किसानों के चेहरे पर चमक ला दी है। किसानों के लिए तो ये पानी की नहीं बल्कि डीजल की बारिश हुई है। क्योंकि बारिश न होने से सिंचाई के लिए काफी डीजल खर्च हो रहा था। मसूर, मटर, अरहर, सरसों जैसी दलहनी फसलों के अलावा ये बारिश गेहूं और गन्ना के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।
देर रात से शुरू हुई बूंदाबांदी शनिवार पूरे दिन रुककर होती रही। बारिश के साथ मध्यम हवाओं ने दिन का पारा सामान्य से तीन डिग्री लुढ़का दिया। दिन का अधिकतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो सामान्य से तीन डिग्री कम था। वहीं रात का न्यूनतम तापमान 20.9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है जो सामान्य से 10 डिग्री कम रहा। मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में बदलाव आया है। हालांकि बारिश आगे होने की संभावना कम है। दो से तीन दिन में तापमान बढ़ोत्तरी संभव है। कृषि विशेषज्ञ कुलदीप विश्नोई के मुताबिक सर्दी की बारिश मसूर, मटर, सरसों आदि फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है। गेहूं की जरूरत के हिसाब से बारिश कम हुई है लेकिन किसान गेहूं में पानी लगाने वाले थे। बारिश की नमी मिलने से फसलों में 50 फीसदी कम पानी लगेगा। डीजल की बचत होगी। जिन किसानों ने गन्ना अभी- अभी बोया है, खेतों में नमी के चलते गन्ना जमने में देरी हो सकती है। ऐसे किसान अपने गन्ने में गोड़ लगा दें तो गन्ने को जमने में आसानी होगी। जो किसान गन्ना बोने की तैयारी कर रहे हैं, उनको खेतों में नमी मिलेगी। वह बिना पलेवा के खेतों की जुताई कर गन्ने की बुवाई कर सकते हैं।