बरेली। सर्दियाें ने दस्तक दे दी है। बाजार में मेवा, मूंगफली चॉकलेट और गजक की खुशबू तैरने लगी है। पारंपरिक तिल और गुड़ की गजक से इतर बाजार में मेवा, मूंगफली, चाॅकलेट वाली गजक भी उपलब्ध है। दुकानों पर काजू मठरी, मावे का समोसा, मक्खन समोसा, तिल सकड़ी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
कारोबारियों के अनुसार, सर्दी में गजक का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। यहां से बदायूं, पीलीभीत, शहजहांपुर, उत्तराखंड के कई जिलों में भी इसकी सप्लाई की जाती है। रोज 50 क्विंटल गजक की खपत होती है। सीजन में छह करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इस बार मेवे वाली गजक की कई वैरायटी आई है। काजू, बादाम व पिस्ता की गजक मौजूद हैं।
दुकानदार राजाराम ने बताया कि पिछले साल ही काजू-पिस्ता वाली गजक की शुरुआत की थी, जिसे ग्राहकों ने खूब पसंद किया। कुतुबखाना, बिहारीपुर, पुराना शहर में गजक बनाने के कई कारखाने हैं।
शोरूम तक बनाई पहुंच : शहर के कई बड़े शोरूम पर प्रीमियम वैरायटी की गजक मिल रही हैं। इनमें गुलाब पत्ती, मल्टी ग्रेन गजक, काजू चिक्की आदि शामिल हैं। बाजार में 200 रुपये से 1000 प्रतिकिलो तक की गजक उपलब्ध है। संवाद