बरेली। सेवानिवृत्त प्रवक्ता की मौत के बाद कथित रिश्तेदार को पिता बताकर 16 वर्षों से पेंशन लेने का मामला सामने आने के बाद अफसर अब सतर्क हुए हैं। 80 साल पूरे कर चुके सभी पेंशनर्स का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। मुख्य कोषागार की टीम घर-घर पहुंचकर सर्वे करेगी।
मुख्य कोषाधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि बदायूं के श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त पिता साेहन लाल शर्मा की मृत्यु के बाद उनका बेटा उमेश भारद्वाज पेंशन लेता रहा। वह पेंशन की रकम लेने के लिए एक रिश्तेदार को पिता बताता रहा। उसके पिता की मौत 19 सितंबर 2008 को हो गई थी। कोषागार, बैंककर्मी और राजस्व विभाग की मिलीभीगत से पेंशन निकालता रहा। उसके पिता की जन्मतिथि 13 जनवरी 1919 थी। अब उनकी उम्र 105 वर्ष होने पर कोषागार के कर्मियों को आशंका हुई तो जांच की गई। प्रकरण की जांच और दस्तावेजों के मिलान के बाद मामला फर्जी मिलने पर जिलाधिकारी और पुलिस को सूचना दी।
बेटे ने फर्जी तरीके से 16 सालों में 60,89,064 रुपये पेंशन निकाली। करीब चार माह पहले जीवन प्रमाण पत्र जमा करने पहुंचा तो बेटे का फर्जीवाड़ा खुला। अब ब्याज समेत 74.66 लाख रुपये वसूली होगी। हालांकि, पकड़े जाने के बाद बेटे ने दो लाख रुपये जमा भी कर दिए हैं।
पारदर्शी सत्यापन हुआ तो सामने आएंगे कई और खेल
पटल सहायक फरमान की सजगता से करीब 16 वर्ष बाद फर्जी तरीके से पेंशन निकालने का मामला पकड़ा गया। जिले में पेंशनर्स की संख्या 26 हजार है। इनमें 80 की उम्र पार कर चुके करीब डेढ़ हजार और सौ वर्ष पूरे कर चुके तीन पेंशनर्स हैं। जिनका सत्यापन होगा। बताते हैं कि अगर सत्यापन पारदर्शी हुआ तो फर्जीवाड़ा के अन्य मामले सामने आ सकते हैं।
पिता की उम्र 65, बेटे की 74 प्रतीत होने पर गहराया शक
बीते वर्ष दो सितंबर को उमेश कथित पिता के साथ जीवन प्रमाण के लिए पहुंचा था। पटल सहायक ने पिता को देखा तो उम्र करीब 64 और जबकि जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार 105 वर्ष थी। बेटे की उम्र 74 वर्ष थी। संदिग्ध प्रतीत होने पर पूछताछ की तो वह चले गए। सदर तहसील से संबंधित पेंशनर्स का सत्यापन कराया तो मौत की पुष्टि होते ही तत्काल पेंशन बंद कर दी गई।
बेटा टॉप टेन बकाएदार में शामिल, रुपये न दिए तो कुर्क होगी जमीन और मकान
एडीएम एफआर संतोष बहादुर सिंह के निर्देश पर तहसील सदर से उमेश भारद्वाज के खिलाफ आरसी जारी कर उसे टॉप टेन बकायादारों में शामिल किया है। संग्रह अमीन वसूली के लिए घर पहुंचा तो उमेश अफसरों के समक्ष पेश होकर फर्जीवाड़ा कुबूला। दो लाख रुपये जमा कर शेष रकम फरीदपुर की पुश्तैनी जमीन बेचकर देने की बात कही। वहीं, अगर रुपये नहीं दिए तो जमीन, मकान कुर्क कर वसूली होगी।
कोषागार, बैंक कर्मी प्रथम दृष्टया दोषी, निदेशालय को भेजा पत्र
फर्जीवाड़ा से पेंशन लेने के मामले में 16 वर्षों में तैनात रहे कोषागार के पटल प्रभारी, बैंक कर्मी की भूमिका संदिग्ध है। मुख्य कोषाधिकारी ने बताया कि 16 सालों तक पटल पर तैनात रहे प्रभारियों की सूची बना रहे हैं। संबंधित बैंक शाखा के प्रबंधक को भी प्रकरण की जानकारी दी लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं दिया। बताया कि बैंक में केवाईसी के दौरान खेल हुआ। सवाल है कि बायोमेट्रिक जांच में खेल क्यों नहीं पकड़ा।
निदेशालय से मांगा है मार्गदर्शन, अब तक नहीं आया जवाब
बीते वर्ष प्रकरण संज्ञान में आने पर विभागीय कर्मचारियों की जांच और कार्रवाई के लिए निदेशालय से मुख्य कोषाधिकारी ने मार्गदर्शन मांगा था लेकिन अभी कोई जवाब नहीं आया। विधिक राय में जिला शासकीय अधिवक्ता ने कहा था कि शासकीय धन की क्षति प्रकरण में धन की हानि, लापरवाही, कूटरचित योजना से संबंधित है। संबंधित संस्तुति पर उमेश भारद्वाज के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट कराई जाएगी।