नगर निगम की रोड के किनारे बेशकीमती जमीन पर दबंगों के कब्जे की जांच जिलाधिकारी गौरव दयाल ने अपर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपी है। एसीएम ने 28 अप्रैल की शाम चार बजे शिकायतकर्ता के अलावा सहायक नगर आयुक्त, बीडीए सचिव और तहसीलदार सदर को मौके पर बुलाया है।
करीब 25 साल पहले गांव सनौआ निवासी अनवार बेग ने शिकायत की थी कि गांव की उत्तरी किनारे पर नगर निगम की गाटा संख्या 241 जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। शिकायककर्ता का आरोप है कि नगर निगम के मानचित्रकार हरीश भारती ने कब्जेदारों के साथ उस पर भी पीपी एक्ट का मुकदमा दर्ज करा दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने लिखित रुप से शपथ पत्र देकर खाली पड़ी जमीन नगर निगम को देने पर सहमति दे दी थी। न्यायालय ने भी उस पर दो हजार का जुर्माना डालकर जमीन नगर निगम को देने के आदेश कर दिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार अब उसके घर के उत्तर दिशा में खाली पड़ी जमीन पर चकरोड की गाटा संख्या 237 जमीन पर गांव के बाबू खां, मोहम्मद सलीम, अब्दुल सादिक निवासी रहपुरा चौधरी ने कब्जा कर सांठ गांठ से एक दूसरे ने क्रेता विक्रेता बनकर उसका बैनामा भी करा रखा है जबकि ये जमीन नगर निगम की है। आरोप है कि कब्जेदार फर्जी बैनामें के आधार पर चकरोड पर अनाधिकृत निर्माण कर आम रास्ता बंद करना चाहते हैं। सहायक नगर आयुक्त विकास सेन भी मामले की मौके पर जाकर जांच कर चुके हैं। इसमें स्थल पर नीव का खुदान किया जाना पाया गया था। एसएनए का कहना है कि कब्जेदारों को चकरोड या नगर निगम की जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण न होने के सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं। डीएम ने मामले की जांच अपर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपी है।
‘शिकायतकर्ता अनवार बेग मेरी जांच से संतुष्ट नहीं थे। इसलिए अपर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है। अनवार बेग की जमीन का खुद भी बैनामा नहीं है। उन्होंने स्टांप चोरी की है। वह किस अधिकार से संपत्ति पर काबिज हैं। जो लोग नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण कर रहे हैं उनको रोका गया है। जांच में मैं सारे पक्ष रखूंगा।’ विकास सेन, सहायक नगर आयुक्त