सेंथल। नौ साल बाद सोमवार को नहर की जमीन से नगर पंचायत सेंथल का कब्जा हटाने के लिए सिंचाई विभाग की टीम तो पहुंची, मगर न तो मजिस्ट्रेट आए और न ही पुलिस बल उपलब्ध कराया गया। ऐसे में टीम कार्रवाई किए बिना ही लौट गई।
सिंचाई विभाग की मांग पर उपजिलाधिकारी नवाबगंज उदित पवार ने नायब तहसीलदार दिवाकर सिंह को मजिस्ट्रेट नियुक्त कर 22 सितंबर की तिथि तय कर पुलिस फोर्स के साथ नहर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। सोमवार को तय समय पर सिंचाई विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
काफी इंतजार करने के बाद न तो मजिस्ट्रेट आए और न ही पुलिस बल। इसके बाद टीम को लौटना पड़ा। बता दें कि वर्ष 2016 में सेंथल-हाफिजगंज मुख्य मार्ग किनारे नगर पंचायत की ओर से स्विमिंग पूल का निर्माण कराया गया था। निर्माण के बाद से ही यह विवादों में घिर गया। लोगों ने आरोप लगाया कि यह नहर की जमीन अतिक्रमण कर बनाया गया है।
जांच के बाद 28 मार्च 2017 को सहायक अभियंता तृतीय ने नगर पंचायत सेंथल को कब्जा हटाने का नोटिस भेज दिया। लेकिन फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुछ समय पूर्व कस्बा निवासी अली अब्बास की शिकायत के बाद स्विमिंग पूल एक बार फिर जांच के दायरे में आ गया। दोबारा जांच के बाद सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता तृतीय की मांग पर उपजिलाधिकारी नवाबगंज उदित पवार ने नायब तहसीलदार दिवाकर सिंह को सोमवार को नहर की जमीन से कब्जा मुक्त कराने का आदेश जारी किया था।
स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई रोकने की मांग
कस्बा निवासी नसीम हैदर, मोहम्मद आमीन और मुनीश कुमार ने ध्वस्तीकरण को रोकने की मांग करते हुए सिविल जज बरेली के यहां याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि तालाब का सुंदरीकरण होने के बाद इसे पिकनिक स्पॉट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने ध्वस्तीकरण रोकने के लिए एसडीएम को पत्र भी दिया है।