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मानसिक अस्पताल गेट पर 11 बजे डाल दिया ताला, रोगियों को नहीं मिला इलाज

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बरेली। मानसिक अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे रोगियों को मंगलवार को तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ा। दरअसल, मंगलवार को सार्वजनिक अवकाश होने की वजह से ओपीडी आधे दिन की ही रही। जानकारी के अभाव में दूसरे जिलों से देरी से पहुंचे मरीजों को बाहर ही इंतजार करना पड़ा। मरीजों के परिजन का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने पूर्वाह्न 11 बजे ही गेट पर ताला लगा दिया था।
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श्यामगंज फ्लाईओवर के पास स्थित मानसिक अस्पताल में मंगलवार को आधे दिन ही ओपीडी रही। इसकी जानकारी न होने की वजह से मुरादाबाद, अलीगढ़, चंदौसी, संभल, बदायूं आदि जिलों से पहुंचे तमाम मरीज इलाज मिलने का इंतजार करते रहे। संभल के विनय मानसिक बीमार मां को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। उनका आरोप है कि पूर्वाह्न 11 बजे ही अस्पताल गेट पर ताला लगा दिया गया था, जबकि पूरा स्टाफ अंदर मौजूद था। जब कर्मचारियों से गेट खोलने को कहा तो उन्होंने अंदर कार्यक्रम चल रहे होने की बात कही। बाद में आधे दिन की ओपीडी बताकर लौटा दिया।
इधर, अस्पताल के स्टाफ का कहना है कि मंगलवार को आधे दिन की ही ओपीडी थी। लिहाजा, पूर्वाह्न 11 बजे तक ही मरीजों को देखने के लिए परचे बने थे। इसके बाद परचा बनाने बंद कर दिए गए। जिन लोगों को आधे दिन की ओपीडी होने की जानकारी नहीं थी, वे 11 बजे के बाद अस्पताल पहुंचे थे, लिहाजा उन्हें बुधवार को आने के लिए कह दिया गया।
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फिर खर्च करने पड़ेंगे किराए में दो हजार रुपये : मरीजों के परिजन का कहना था कि अगर आधे दिन की भी ओपीडी थी तो चिकित्सक ों को दोपहर बारह बजे तक पहुंचे मरीजों का इलाज करना चाहिए था। विनय के मुताबिक वह सुबह 11.30 बजे पहुंच गए थे पर गेट पर ताला 11 बजे ही लगा दिया गया था। संभल से वह अपनी बीमार मां को दो हजार रुपये किराए पर गाड़ी लेकर लाए थे। बुधवार को आने पर उन्हें फिर दो हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
आहुति परिवार ट्रस्ट ने मनोरोगियों को खिलाया खाना : आहुति परिवार ट्रस्ट ने मानसिक चिकित्सालय में दूर-दराज से उपचार के लिए आए रोगियों और उनके तीमारदारों को भूखे-प्यासे भटकते देख उनके भोजन की व्यवस्था की। सभी को खाने के पैकेट वितरित किए। इसमें डॉ. यशपाल सिंह, ओमकार सिंह, सुबोध, अरुण, संजय प्रताप सिंह, लक्ष्य लता प्रजापति, नीरज कुमार आदि ने सहयोग किया।
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