अपनी पोल खुलने के डर से नगर निगम के अफसर टैक्स वसूली में बड़े बकायेदारों की सूचना तक छिपा रहे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी जानकारी नहीं दी गई। जब नगर आयुक्त ने भी संज्ञान नहीं लिया तो राज्य सूचना आयोग में अपील की गई है।
जागर जनकल्याण समिति के सचिव डा. प्रदीप कुमार ने दो दिसंबर 2015 को जनसूचना अधिकारी से टैक्स बकायेदारों के बारे में छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें सरकारी, अर्द्ध सरकारी, निगम, निकायों पर बकाया , बीस साल से प्रतिवर्ष वसूले जाने वाले टैक्स की आय, नगर निगम के टैक्स विभाग में कार्यरत अफसर और कर्मचारियों की मासिक वेतन समेत सूची और उन कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी जिनके खिलाफ काम में शिथिलता बरतने पर कार्रवाई की गई की गई थी। एक माह तक जब सूचना नहीं मिली तो प्रथम अपीलीय अधिकारी नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव से अपील की गई। इसमें भी आवेदन निस्तारित नहीं होने पर मामले की अपील राज्य सूचना आयोग में की गई है। डा. प्रदीप जागर ने दो साल पहले कर्मचारी नगर में टैक्स की अनियमितताओं की सूचना मांगी थी। तब नगर निगम ने ये आरटीआई में वह सूचना दे दी थी। इसके आधार पर मुख्य कर निर्धारण अधिकारी राकेश कुमार सोनकर को शासन ने निलंबित कर दिया था।
‘आरटीआई में सूचना कोई भी मांग सकता है लेकिन उनका उद्देश्य पारदर्शी होना चाहिए। डा. प्रदीप ने ऐसी सूचनाएं मांगी हैं जो बहुत लेंथी हैं। हालांकि ये सूचनाएं भी दी जानी चाहिए थीं। स्टाफ से पता करूंगा कि आरटीआई की सूचना क्यों नहीं दी।’
-ईश शक्ति कुमार सिंह, जनसूचना अधिकारी नगर निगम