बरेली। पीलीभीत बाइपास पर फायरिंग के मामले में मोबाइल फोन व सर्विलांस की जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। दोनों गुटों के प्रमुख लोगों के मोबाइल फोन का रिकाॅर्ड बता रहा है कि उन्हें कुछ नेताओं से ऊर्जा मिल रही है। तकनीक के जरिये साक्ष्य जुटाकर गोलीकांड की साजिश रचने वाले सफेदपोशों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
इस मामले में पहले दिन से ही कुछ नेताओं के नाम बयानों में उछल रहे हैं। इनमें एक गुट के लोग अक्सर अपने बयान में नेताओं के नाम ले रहा है। वहीं, कुछ नेताओं के नाम अभी पर्दे के पीछे ही हैं। फायरिंग के दिन ही आदित्य उपाध्याय और उसके बेटे को पकड़ लिया गया था। उनके मोबाइल फोन भी पुलिस ने उसी दिन कब्जे में ले लिए थे।
उस दिन पहले आदित्य पक्ष से जो तहरीर पुलिस को मिली, वह सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। उसमें एक नेता का नाम साजिशकर्ता के तौर पर लिखा गया था। कुछ घंटे बाद तहरीर बदल दी गई। दूसरी तहरीर में नेता का नाम मौके पर मौजूद लोगों में शामिल था। चर्चा रही कि तहरीर बदलवाने में दूसरे नेता का हाथ रहा। वहीं, कई और नेताओं की संलिप्तता भी बताई जा रही थी। अब राजीव पक्ष की गिरफ्तारी व इनके मोबाइल फोन की जांच से भी कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। व्हाट्सएप कॉल व मेसेज करके डिलीट किए गए हैं, जिनको लेकर पूछताछ में स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका है। ब्यूरो
फॉरेंसिक जांच में साफ होगी तस्वीर
मोबाइल फोन में मौजूद किसी भी तरह का डाटा डिलीट करने के बाद भी रिकवर हो जाता है। विधिक प्रक्रिया के तहत सभी आरोपियों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे। अभी जो चीजें संदेह के दायरे में हैं, वे पुष्ट होकर सामने आईं तो दोषियों पर कार्रवाई होगी, भले ही वह कितने भी राजनीतिक या रसूखदार क्यों न हों। - अनुराग आर्य, एसएसपी