बरेली। स्मार्ट सिटी पर तीसरी और आखिरी वर्कशाप में आए प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने कंसल्टेंट एजेंसी के दिए गए विकल्पों पर एक बार फिर अपने सुझाव रखे। कंसल्टेंट एजेंसी ने स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट पर अब तक हुई प्रगति का ब्योरा रखा। पब्लिक सुझाव में 55 फीसदी लोगों ने स्मार्ट सिटी के तीन विकल्पों में से एक ‘ग्रीन फील्ड’ चुना। इसमें भी रामगंगा नगर की250 एकड़ से ज्यादा जमीन पर ‘नया शहर’ बसाने को बरेली ने बहुमत दिया है।
जिलाधिकारी गौरव दयाल की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे स्मार्ट सिटी की वर्कशाप प्रारंभ हुई। कंसल्टेंट एजेंसी के प्रतिनिधियों ने बताया कि चतुर्थ चरण में केंद्र सरकार पहले 20 शहरों का चयन करेगी और पांचवें राउंड में बाकी 80 शहरों को शामिल कर उनको स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा।
कंसल्टेंट एजेंसी प्रतिनिधि करन अग्निहोत्री, राजेश करन, सिद्धार्थ शाह और संजय कुमार ने स्मार्ट सिटी पर अपने कामों का ब्योरा रखा। एजेंसी ने सोशल मीडिया में 30 हजार लोगों से फेसबुक, गूगल, ट्वीटर, ब्लाग्स के माध्यम से स्मार्ट सिटी के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए सुझाव शेयर करने की बात कही।
वर्कशाप में डीआईजी आरकेएस राठौर, डीएम गौरव दयाल, मेयर डा. आईएस तोमर, एसएसपी धर्मवीर यादव, नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव, अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, बीडीए सचिव गरिमा यादव, एसपी सिटी समीर सौरभ, कंसल्टेंट एजेंसी हेड जान बोर्नेँट, उद्यमी अजय शुक्ला, सुरेश सुदंरानी, डीआईओएस गजेंद्र सिंह, इन्वर्टिस चांसलर उमेश गौतम, आवास विकास एई एके सक्सेना, एनएसए डा. अशोक कुमार, स्वास्थ्य विभाग से डा. आरएन गिरी आदि मौजूद थे।
रामगंगा नगर का विकल्प
रामगंगा नगर में बरेली विकास प्राधिकरण की 670 एकड़ जमीन है। एयरफोर्स 13 किलोमीटर और सिटी जंक्शन तीन किलोमीटर दूर है। रामगंगा नगर में बीडीए अपनी आवासीय योजनाएं डेवलप कर रहा है। अभी यहां बने मकानों में दो हजार परिवार रहते हैं। अधिकांश जमीन खाली है। इस पर नया शहर बस सकता है। रबड़ फैक्ट्री में 15 सौ एकड़ और सीबीगंज में 775 एकड़ जमीन है पर यहां कई तरह की अड़चनें आ रही है।
सोडियम की जगह एलईडी
कंसल्टेंट एजेंसी ने स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में नगर निगम को शहर में लगी 25 हजार सोडियम लाइटों के स्थान पर एलईडी लगाने का विकल्प रखा है। सोडियम लाइटों में 70 से दो सौ वाट के बल्ब प्रयोग किए जा रहे हैं। इन पर नगर निगम का 75 लाख रुपये हर माह खर्च होते हैं। एजेंसी के मुताबिक एलईडी लाइटें यूज करने से बजट में 40 से 80 फीसदी की बचत की जा सकती है।
डोर टू डोर रिक्शों में जीपीएस सिस्टम
कंसल्टेंट एजेंसी ने डोर टू डोर कूड़ा एकत्रीकरण योजना 30 प्रतिशत एरिया में चलने की जानकारी दी। रिक्शों की मानीटरिंग के लिए कंट्रोलरूम नहीं है। एजेंसी का सुझाव था कि रिक्शों में जीपीएस सिस्टम लगाने से उनकी निगरानी की जा सकती है। चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का सुझाव भी शामिल किया गया।
प्रोजेक्ट में 17 बिंदुओं पर होगा काम
1- बिजली सप्लाई। इसमेें सोलर लाइट को प्राथमिकता।
2- वाटर सप्लाई और वाटर ट्रीटमेंट
3- कूड़ा उठाना और कूड़ा निस्तारण प्रबंधन
4- रेन वाटर हार्वेस्टिंग
5- स्मार्ट ट्रांसपोर्ट
6- आईटी कनेक्विटी और डिजीटलाइजेशन
7- पैदल चलने के लिए पाथवे
8- एक एरिया में नान मोटराइज्ड जोन
9- कुशल ट्रैफिक मैनेजमेंट
10- वाहनों के लिए गलियों में प्रतिबंधित जोन बनाना
11- स्मार्ट पार्किंग
12- खुले एरिया का बेहतर इस्तेमाल
13- चिल्ड्रन और वूमेन और सीनियर सिटीजन की सुरक्षा
14- 80 फीसदी ग्रीन बिल्डिंग बनाना
15- पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था
16- विजिबल इंप्रूवमेंट इन एरिया
17- 15 प्रतिशत एर्फोडेबिल हाउसिंग कैटेगरी