बरेली। जिले में क्रिकेट, फुटबॉल और कुश्ती के मैदानों में पसीना बहाने वाले युवा अब आर्म रेसलिंग यानी पंजा लड़ाने के खेल में अपनी ताकत का लोहा मनवा रहे हैं। जिसे कभी स्कूल, कॉलेज की कैंटीन या गली-मोहल्लों में महज मनोरंजन और खाली समय की मस्ती समझा जाता था, आज उस खेल ने एक पेशेवर पहचान हासिल कर ली है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यूपी ओलंपिक एसोसिएशन से मिली आधिकारिक मान्यता है, जिसने शहर के युवाओं के लिए करियर के नए द्वार खोल दिए हैं।
इस खेल के प्रति बढ़ती दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में अब तक 350 से अधिक खिलाड़ियों ने आधिकारिक प्रतियोगिताओं के लिए अपना पंजीकरण कराया है। शहर के जिमों का नजारा भी अब बदला-बदला सा नजर आता है। जहां पहले युवा केवल बॉडीबिल्डिंग, बेंच प्रेस या पावरलिफ्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते थे, वहीं अब खिलाड़ियों का एक बड़ा वर्ग विशेष रूप से आर्म रेसलिंग की बारीकियों को सीखने और उसकी विशिष्ट ट्रेनिंग लेने में जुटा है। आर्म रेसलिंग एसोसिएशन ऑफ बरेली के सचिव अकमल खान ने बताया कि बरेली के कोने-कोने में, चाहे वह शहरी इलाका हो या ग्रामीण क्षेत्र, असाधारण प्रतिभाएं छिपी हुई हैं। एसोसिएशन का मुख्य लक्ष्य इन खिलाड़ियों को एक सही मंच प्रदान करना है ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकें। यह एक ओपन कैटेगरी इवेंट है, जिसमें किसी भी क्षेत्र का प्रशिक्षित खिलाड़ी हिस्सा ले सकता है।